नयी दिल्ली , दिसंबर 04 -- राज्यसभा में गुरुवार को कई सदस्यों ने प्रदूषण का मुद्दा उठाया और राष्ट्रीय राजधानी तथा आसपास के शहरों में वायु प्रदूषण के ऊंचे स्तर पर चिंता व्यक्त की।
ओडिशा से बीजू जनता दल की सांसद सुलता देव ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ गया है कि यहां लोगों के स्वास्थ्य को खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के दलों ने लोकसभा चुनाव के समय "400 पार" का जो नारा दिया था वह दिल्ली में सफल हो गया है, यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) लगातार 400 के पार है। उन्होंने कहा कि औद्योगीकरण और विकास जरूरी है, लेकिन उद्योग लगाने के लिए पेड़ काटना जरूरी नहीं है।
उन्होंने कहा कि जाड़े में देश के दूसरे शहरों की तुलना में दिल्ली में फेफड़ें से जुड़ी बीमारी की दवाओं की बिक्री 14 प्रतिशत ज्यादा होती है। यह दिखाता है कि यहां प्रदूषण के कारण लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। छोटे बच्चे भी अस्थमा की बीमारी का शिकार हो रहे हैं।
कांग्रेस की रंजीत रंजन ने प्रदूषण के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों को एक समान जिम्मेदार बताते हुए कहा कि देश के 60 प्रतिशत जिले प्रदूषण की चपेट में हैं। पहले दिवाली के बाद की सर्दी गुदगुदाती थी, लेकिन अब डॉक्टर दिवाली के बाद दिल्ली छोड़ देने की सलाह देते हैं। लेकिन हर व्यक्ति के लिए यह संभव नहीं होता है। लोग प्रदूषण के कारण अपने घरों में बैठने के लिए मजबूर हैं, उनमें गुस्सा है। खिलाड़ी जॉगिंग के लिए नहीं जा पा रहे हैं, बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।
हरियाणा से भारतीय जनता पार्टी के सदस्य सुभाष बरला ने ई-कचरे का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि देश में हर साल 50 लाख टन ई-कचरा पैदा होता है। घरों से निकलने वाला ई-कचरा कहीं भी फेंक दिया जाता है। इनके भीतर रासायनिक प्रतिक्रिया से जहरीले पदार्थ उत्पन्न होते हैं। ई-कचरे को लोग खुले में जलाते हैं जिससे जहरीली गैस निकलती है।
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