पटना , दिसंबर 07 -- बिहार में रविवार को महादलित, दलित, अल्पसंख्यक और अतिपिछड़ा वर्ग अक्षर आंचल योजना के तहत बुनियादी साक्षरता परीक्षा आयोजित की गयी, जिसमें राज्य भर की लाखों नवसाक्षर महिलाओं ने भाग लिया।

यह परीक्षा प्रत्येक पंचायत के संकुल विद्यालयों में आयोजित की गई, जहां सुबह से ही महिलाओं की उत्साह से भरी भीड़ देखने को मिली।

परीक्षा में शामिल होने वाली सभी महिलायें महादलित, दलित, अल्पसंख्यक एवं अतिपिछड़ा वर्ग समुदायों से आती हैं। इन समुदायों की 15 से 45 वर्ष आयु वर्ग की असाक्षर महिलाओं को साक्षर बनाने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग के जन शिकायत निदेशालय की ओर से अक्षर आंचल योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत छह महीने का साक्षरता पाठ्यक्रम चलाया जाता है, जिसे पूरा करने के बाद महिलाओं को बुनियादी साक्षरता परीक्षा में शामिल किया जाता है।

इस चरण में करीब 10,50,828 नवसाक्षर महिलाओं के परीक्षा में बैठने का लक्ष्य निर्धारित था। जिलों से वास्तविक उपस्थिति की रिपोर्ट जन शिक्षा निदेशालय द्वारा संकलित की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस बार भी महिलाओं की उपस्थिति बेहद संतोषजनक रही है, जो इस योजना के प्रति बढ़ती जागरूकता का प्रमाण है।

असाक्षर महिलाओं को पढ़ाने का दायित्व महादलित, दलित, अल्पसंख्यक एवं अतिपिछड़ा बहुल बस्तियों में तैनात शिक्षा सेवकों को दिया गया है। इन सेवकों के निरंतर प्रयासों से ही बड़ी संख्या में महिलायें पढ़ने- लिखने में सक्षम हो रही हैं। प्रत्येक छह माह पर होने वाली इस परीक्षा में उत्तीर्ण महिलाओं को साक्षरता प्रमाण- पत्र प्रदान किया जाता है, जो आगे की पढ़ाई और रोजगार के अवसरों में सहायक सिद्ध होता है।

सुनियोजित परीक्षा संचालन सुनिश्चित करने के लिये जन शिक्षा निदेशालय और जिलों के साक्षरता पदाधिकारियों ने कई परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। अधिकारियों ने केंद्रों पर उपस्थित महिलाओं के उत्साह की सराहना की और परीक्षा व्यवस्था को संतोषजनक बताया।

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