शिमला , अक्टूबर 29 -- हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने राज्य सरकार में प्रमुख प्रशासनिक पदों पर नियमित अधिकारियों के बजाय कार्यवाहक अधिकारियों की नियुक्ति की बढ़ती प्रवृत्ति को गंभीरता से लेकर इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है।
एक कार्यकर्ता की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए राज्यपाल ने मुख्य सचिव संजय गुप्ता को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर रिपोर्ट देने और उचित कार्रवाई करने को कहा है।
हिमाचल के इतिहास में पहली बार मुख्य सचिव (सीएस), पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और प्रधान मुख्य वन संरक्षक-प्रधान मुख्य वन बल प्रमुख (पीसीसीएफ-एचओएफएफ) जैसे तीनों शीर्ष प्रशासनिक पद अतिरिक्त या कार्यवाहक प्रभार वाले अधिकारी संभाल रहे हैं। इस प्रवृति में इजाफा करते हुए प्रवीण कुमार गुप्ता को प्रतिनियुक्ति के आधार पर हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का सदस्य सचिव नियुक्त कर दिया गया है।
शिकायत में राजपाल का ध्यान आकर्षित किया गया कि राज्य की शासन व्यवस्था अस्थायी व्यवस्था पर चल रही है जिससे प्रशासनिक स्थिरता कमजोर हो रही है। राज्यपाल ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए अब मुख्य सचिव से शीर्ष पदों को कार्यवाहक आधार पर सौंपने के बारे में स्पष्टीकरण माँगा है।
सेवानिवृत्त वरिष्ठ नौकरशाहों ने भी इस स्थिति पर निराशा व्यक्त की है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी दीपक सानन ने कहा, "राज्य में पहली बार मुख्य सचिव और डीजीपी को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। ऐसे पदों को नियमित नियुक्तियों के माध्यम से भरा जाना चाहिए ताकि अधिकारी स्वतंत्र रूप से और पूरे अधिकार के साथ काम कर सकें।"हिमाचल प्रदेश प्रशासन कई महीनों से बिना नियमित नियुक्तियों के काम कर रहा है। डीजीपी महीने से अधिक समय से, पीसीसीएफ-एचओएफएफ लगभग दो महीने से और मुख्य सचिव लगभग 25 दिनों से कार्यवाहक आधार पर काम कर रहे हैं।
श्री प्रबोध सक्सेना की सेवानिवृत्ति के बाद सरकार ने श्री संजय गुप्ता को कार्यवाहक मुख्य सचिव नियुक्त किया। डॉ. अतुल वर्मा की सेवानिवृत्ति के बाद श्री अशोक तिवारी को डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। इसी तरह पवनेश कुमार की सेवानिवृत्ति के बाद संजय सूद को कार्यवाहक पीसीसीएफ-एचओएफएफ का प्रभार सौंपा गया।
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