लखनऊ , नवम्बर 4 -- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त मॉनीटरिंग और स्पष्ट निर्देशों के चलते उत्तर प्रदेश में राजस्व विवादों के मामलों के निस्तारण में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री स्वयं प्रत्येक माह जिलावार समीक्षा करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप अधिकारीगण पूरी तत्परता के साथ राजस्व मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटा रहे हैं।

राजस्व परिषद की राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) की अक्टूबर माह की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश भर में कुल 324897 राजस्व मामलों का निस्तारण किया गया। इस सूची में लखनऊ जिले ने 15260 मामलों के निस्तारण के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया है। प्रयागराज ने 10501 मामलों के निस्तारण से दूसरा स्थान, गोरखपुर ने 8165 मामलों से तीसरा, कानपुर नगर ने 7866 मामलों से चौथा तथा शाहजहांपुर ने 7707 मामलों के साथ पांचवां स्थान प्राप्त किया है।

राजस्व वादों के निस्तारण में जिला स्तरीय न्यायालयों में एक बार फिर जौनपुर प्रथम स्थान पर रहा। जौनपुर की पांच राजस्व न्यायालयों ने बोर्ड के निर्धारित मानक 250 मामलों के सापेक्ष 480 मामलों का निस्तारण किया, जो 192 प्रतिशत की उपलब्धि है। इसके बाद लखीमपुर खीरी ने 334 मामलों (मानक 300 के सापेक्ष) का निस्तारण कर दूसरा और बस्ती ने 310 मामलों के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया।

जिलाधिकारी न्यायालयों में जौनपुर ने 30 मामलों के मानक के सापेक्ष 71 मामलों का निस्तारण (236.67 प्रतिशत) किया, जिससे वह प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा। भदोही ने 63 मामलों के निस्तारण से दूसरा, जबकि मऊ ने 51 मामलों के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया है।

अपर जिलाधिकारी (भू-राजस्व) जौनपुर ने निर्धारित मानक 50 के मुकाबले 184 मामलों का निस्तारण कर प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। गाजीपुर 36 मामलों के साथ दूसरे और मीरजापुर 24 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। लगातार 13 माह से जौनपुर जनपदीय न्यायालयों में निस्तारण की श्रेणी में टॉप-फाइव जिलों में बना हुआ है।

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