पटना , फरवरी 03 -- बिहर के उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा मंगलवार को कहा कि राजस्व प्रशासन का मूल उद्देश्य आम नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और न्यायसंगत सेवा उपलब्ध कराना है।

श्री सिन्हा ने कहा कि लंबे समय से यह देखा जा रहा था कि 'सक्षम न्यायालय' और 'लंबित' जैसे शब्दों की अलग-अलग व्याख्या के कारण दाखिल-खारिज सहित कई राजस्व मामले अनावश्यक रूप से अटके रह जाते थे। इसका सीधा असर आम लोगों के काम पर पड़ता था।

प्रधान सचिव द्वारा जारी यह स्पष्ट मार्गदर्शन राजस्व कार्यप्रणाली में एकरूपता लाएगा और अंचल स्तर पर निर्णय लेने में भ्रम की स्थिति समाप्त करेगा। अब केवल विधिवत स्वीकारित वाद और प्रभावी स्थगनादेश की स्थिति में ही राजस्व प्रक्रिया रुकेगी, अन्यथा कार्यवाही निरंतर जारी रहेगी।

दाखिल-खारिज एवं भूमि विवाद से जुड़े मामलों में हो रहे अनावश्यक विलम्ब को समाप्त करने के उद्देश्य से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। प्रधान सचिव सी. के. अनिल ने सभी अंचल अधिकारियों को ई-मेल के माध्यम से निर्देश जारी करते हुए बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 की धारा-6 (12) में प्रयुक्त शब्द 'सक्षम न्यायालय' एवं 'लंबित' की स्पष्ट व्याख्या कर दी है।

पत्र में कहा गया है कि विभागीय समीक्षा में यह पाया गया है कि इन शब्दों की अलग-अलग अंचलों में भिन्न व्याख्या किए जाने के कारण दाखिल-खारिज वादों, सीमांकन, भू-मापी तथा अन्य राजस्व मामलों के निष्पादन में अनावश्यक विलम्ब हो रहा था। इससे वास्तविक क्रेता भी असमंजस की स्थिति में रहते थे।

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