ज्वालाजी (कांगड़ा) , फरवरी 15 -- हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आरोप लगाया है कि सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था को ठीक से प्रबंधित नहीं कर रही है और राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को लेकर ओछी राजनीति कर रही है।

श्री ठाकुर ने कांगड़ा जिले के ज्वालाजी विधानसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान ऐतिहासिक ज्वाला जी मंदिर में पूजा-अर्चना की और राज्य के लोगों की खुशी, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और बाद में वे लखदाता पीर दंगल मेले में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए, जहाँ उन्होंने राज्य की सांस्कृतिक विरासत के हिस्से के रूप में पारंपरिक कुश्ती को बचाने की कोशिशों की तारीफ की।

इस दौरान उन्होंने संवाददाताओं सो बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू आरडीजी मुद्दे पर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 14वें वित्त आयोग के बाद से ही इसमें धीरे-धीरे कमी करने का संकेत दिया गया था।

उन्होंने दावा किया कि 13वें वित्त आयोग के दौरान राज्य को 7,800 करोड़ रुपये मिले, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 14वें वित्त आयोग के तहत 40,000 करोड़ रुपये और 15वें वित्त आयोग के तहत 48,000 करोड़ रुपये मिले।

श्री ठाकुर ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार पिछले तीन सालों में राज्य के अपने राजस्व संसाधन को बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने में नाकाम रही है।उन्होंने सरकार के अंदर विरोधाभास का आरोप लगाते हुए कहा कि जहां अधिकारी मानते हैं कि खजाने पर दबाव है। सब्सिडी और भत्ता देने में दिक्कत हो रही है। वहीं मुख्यमंत्री 2027 तक हिमाचल को आत्मनिर्भर और 2032 तक सबसे खुशहाल राज्य बनाने के "अवास्तविक" दावे कर रहे हैं।

सरकार पर विकास के काम रोकने और पूर्वर्ती भाजपा सरकार के दौरान शुरू की गई जनकल्याण योजनाओं को खत्म करने का आरोप लगाते हुए भाजपा नेता ने कहा कि राज्य के संसाधन मुख्यमंत्री के दोस्तों के आराम के लिए बर्बाद किए जा रहे हैं जबकि आम लोग परेशान हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर सरकार रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाती है और केंद्र के साथ ठीक से समन्वय रखती है, तो भाजपा राज्य के हित में सहयोग देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में कई केंद्र प्रायोजित योजना 90:10 फंडिंग पैटर्न पर चल रही हैं।

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