जयपुर , फरवरी 11 -- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने बुधवार को विधानसभा में पेश किये गये राज्य बजट को निराशाजनक और प्रदेश की जनता में भविष्य को लेकर चिंताएं पैदा करने वाला करार दिया है।

श्री गहलोत ने अपने बयान में बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि भाजपा सरकार के बजट में कोई घोषणा ऐसी नहीं है जिसे व्यापक जनहित में कहा जा सके। समाज का हर वर्ग इस बजट को देखकर हताश होगा। इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करने वाली भाजपा सरकार ने पूरे बजट में रिफाइनरी तथा ईआरसीपी जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स का जिक्र तक नहीं किया है। पिछले बजट में रिफाइनरी का उद्घाटन गत अगस्त तक करने की घोषणा की गई जो आज तक पूरी नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन में हर वर्ष 15 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान कांग्रेस सरकार ने किया था। पिछले दो बजट में इस बढ़ोत्तरी की घोषणा भी की जाती थी परन्तु इस बार सामाजिक सुरक्षा पेंशन में बढ़ोत्तरी की कोई घोषणा न होने से 90 लाख से अधिक सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभार्थियों में निराशा हुई है। पांच साल में चार लाख सरकारी नौकरी की आस लगाकर बैठे युवाओं के लिए किसी बड़ी भर्ती की घोषणा नहीं की गई है। कम पदों पर भी भर्तियां संविदा आधार पर करने की घोषणा की है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की तर्ज पर स्टेट टेस्टिंग एजेंसी बनाने की घोषणा की गई है पर एनटीए बीते दिनों विवादों का केन्द्र बनी थी।

श्री गहलोत ने आरपीएससी में सदस्य संख्या बढ़ाकर 10 करने वाली भाजपा सरकार अभी तक आरपीएससी सदस्यों की रिक्तियों तक को नहीं भर सकी है। एसटीए केवल और केवल भाजपा सरकार के दौरान हो रहे ओएमआर घोटाले से युवाओं का ध्यान हटाने की कवायद लगती है। कांग्रेस सरकार के दौरान गरीब वर्ग के लिए शुरू की गई अन्नपूर्णा राशन किट को बहाल नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि देशभर में उदाहरण बनी 25 लाख रुपये की चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना (वर्तमान में मा योजना) के बारे में जनता में यह भ्रम की स्थिति बन चुकी है कि यह बीमा अब 25 लाख की बजाय पांच लाख रुपये का हो चुका है जबकि कागजों में बीमा अभी भी 25 लाख रुपये का है। सरकार को कम से कम इस भ्रांति को दूर करने के लिए ही एक घोषणा करनी चाहिए थी। राज्य के सरकारी कर्मचारियों को उम्मीद थी कि जिन मांगों को लेकर उन्होंने जयपुर में बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया था उन पर ध्यान दिया जाएगा एवं इससे संबंधित घोषणा की जाएगी परन्तु उन्हें भी निराशा हाथ लगी।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया को भी इस बजट से निराशा ही हाथ लगी है क्योंकि पूरे बजट में पत्रकारों के लिए भी कोई घोषणा नहीं की गई है। नए जिलों पर भी भाजपा केवल राजनीति कर रही है। जुलाई 2024 में पेश किए गए संशोधित बजट में सरकार ने नए जिलों के बुनियादी ढांचे के लिए एक हजार करोड़ की घोषणा की थी। फिर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गत वर्ष 12 मार्च को विधानसभा में बजट चर्चा के जवाब के दौरान पुनः ऐसी ही घोषणा की। आज पुनः तीन हजार करोड़ रुपए नए जिलों में मिनी सचिवालय के लिए घोषित किए हैं। दो साल में कितने मिनी सचिवालय बने हैं, यह भी जानकारी देनी चाहिए थी।

श्री गहलोत ने कहा कि वित्त मंत्री ने 2024 के बजट में 25 लाख नल कनेक्शन एवं 2025 के बजट में 20 लाख नल कनेक्शन इन वित्त वर्षों में देने की घोषणा की थी। आज स्वयं वित्त मंत्री ने बताया है कि दो साल में 14 लाख जल कनेक्शन ही लगाए जा सके हैं जबकि वादा 45 लाख नल कनेक्शन का था। ये सरकार की खुली असफलता है जबकि यही भाजपा कांग्रेस सरकार पर जल जीवन मिशन की धीमी गति करने के आरोप लगाती थी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार में एक भावना थी कि जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के लिए काम मांगते-मांगते थक जाएंगे पर सरकार काम देते-देते नहीं थकेगी। यह कांग्रेस सरकार ने सिर्फ कहा नहीं बल्कि करके दिखाया एवं घोषणाएं जमीन पर उतरीं। भाजपा सरकार की हालत देखने के बाद न तो जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के लिए कुछ मांग पा रहे हैं और न ही सरकार कुछ काम दे पा रही है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित