जयपुर , फरवरी 12 -- राजस्थान विधानसभा में बजट सत्र के दौरान गुरुवार को 'राइट टू हेल्थ' कानून के नियमों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोकझोंक हुई और चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के जवाब से असंतुष्ट होकर कांग्रेस विधायकों ने सदन में नारेबाजी की और सदन से बहिर्गमन किया।

प्रश्नकाल में कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा के राइट टू हेल्थ एक्ट के नियम लागू न होने से जुड़े प्रश्न पर श्री खींवसर ने जवाब देते हुए कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार चुनावी फायदे के लिए आचार संहिता से ठीक पहले यह बिल लाई थी। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (मा ) के तहत जनता को हर तरह का मुफ्त इलाज मिल रहा है, तो इस कानून की अलग से कोई जरूरत ही नहीं है। इस बयान पर कांग्रेस सदस्य अपनी जगहों पर खड़े हो गए और विरोध करने लगे।

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि सरकार को अपनी मंशा साफ करनी चाहिए कि वह इस कानून को लागू करना चाहती है या नहीं। श्री जूली ने कहा कि राजस्थान देश का पहला राज्य था जो यह कानून लाया, फिर इसके नियम बनाने में देरी क्यों हो रही है। इस दौरान कांग्रेस के सदस्य सदन के बीचोंबीच आ गये और नारेबाजी करने लगे।

इस पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अगर सदन चलाने में इसी तरह का असहयोग और हंगामा जारी रहा तो वह सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर देंगे। श्री देवनानी ने इसके बाद अगले प्रश्न के लिए नाम पुकारने के पश्चात कांग्रेस सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए।

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