जयपुर , मार्च 27 -- राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में पीएम-कुसुम योजना से नई ऊर्जा क्रांति का सूत्रपात हो रहा है और गत सवा दो साल में 3462 मेगावाट के 1525 संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पीएम-कुसुम योजना में लग रहे ग्रिड कनेक्टेड विकेन्द्रित सौर ऊर्जा संयंत्रों से प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र में नई क्रांति आई है और इन संयंत्रों से उत्पन्न बिजली से किसानों का दिन में सिंचाई का सपना साकार हो रहा है। गांव-ढ़ाणी और घर रोशन हो रहे हैं वहीं ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उद्यमिता के नए युग की शुरूआत से अन्नदाता ऊर्जादाता और भाग्य विधाता बन गया है। इससे कोयले से उत्पन्न बिजली पर निर्भरता कम हुई है और सस्ती एवं प्रदूषणरहित सौर ऊर्जा का उपयोग कृषि में बढ़ा है।
राजस्थान के गांव-ढ़ाणी में कुसुम कंपोनेंट-ए एवं कंपोनेंट-सी में अब तक 3585 मेगावाट के 1617 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें से 3462 मेगावाट के 1525 संयंत्र गत दो वर्ष एवं तीन महीने की छोटी सी अवधि में स्थापित हुए हैं। यह आंकड़े श्री शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा इस योजना को दिए जा रहे प्रोत्साहन तथा व्यापक जनभागीदारी की सफलता को दर्शाते हैं।
कुसुम कम्पोनेंट-ए में 686 मेगावाट के 496 संयंत्र स्थापित हो चुके हैं। इसमें राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है। वहीं कम्पोनेंट-सी में 2899 मेगावाट के 1121 प्लांट लग चुके हैं। इसमें राजस्थान का द्वितीय स्थान है। योजना के तहत फीडर लेवल सोलराइजेशन में श्रेष्ठ उपलब्धि के लिए केन्द्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इसी वर्ष जनवरी में दिल्ली में आयोजित हुए ऑल इंडिया डिस्कॉम्स एसोसिएशन के वार्षिक समारोह में राजस्थान डिस्कॉम्स को गोल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया था।
मुख्यमंत्री ने वर्ष-2027 तक प्रदेश के किसानों को सिंचाई के लिए दिन में बिजली देने का संकल्प लिया है और इस संकल्प को साकार करने में यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इन संयंत्रों से उत्पादित बिजली से प्रदेश में 2 लाख 29 हजार से अधिक किसानों को खेती के लिए दिन में बिजली सुलभ हो रही है।
गत समय में प्रदेश में कुसुम प्लांटों के स्थापित होने की गति और तेज हुई है और जयपुर, जोधपुर और अजमेर विद्युत वितरण निगम क्षेत्र में औसतन तीन से चार नए प्लांट प्रतिदिन लग रहे हैं। जिनसे औसतन 10 मेगावाट क्षमता प्रतिदिन ग्रिड से अतिरिक्त जुड़ रही है। इस वर्ष जनवरी माह में ही 286 मेगावाट तथा फरवरी माह में 295 मेगावाट क्षमता के प्लांट ग्रिड से जुड़ चुके हैं। कम्पोनेंट-ए में सर्वाधिक 86 प्लांट्स अकेले बीकानेर जिले में स्थापित हुए हैं। इसके पश्चात 34 सौर ऊर्जा संयंत्र जोधपुर तथा 32 सौर संयंत्र झुंझुनूं सर्किल में लग चुके हैं। वहीं कम्पोनेंट-सी में फलौदी में 24,561, जोधपुर में 22,469 तथा बीकानेर में 22003 सोलर पंपों को ऊर्जीकृत किया जा चुका है।
इस योजना को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए प्रदेश के तीनों विद्युत वितरण निगम लगातार अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। लेटर ऑफ अवॉर्ड जारी करने, सोलर प्लांट स्थापित करने तथा पावर परचेज एग्रीमेंट करने से संबंधित प्रक्रियाओं का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाता है। एसओपी में निहित प्रावधानों के अनुरूप मीटर टेस्टिंग, ट्रांसमिशन लाइनें डालने तथा ट्रांसफार्मर से संबंधित तकनीकी प्रक्रियाओं को निर्धारित समय पर पूर्ण किया जा रहा है।
योजना में 33 केवी ग्रिड सब स्टेशन से पांच किलोमीटर के दायरे में किसान, किसान समूह, सहकारी समितियां तथा सौर ऊर्जा उत्पादक स्वयं अथवा लीज पर भूमि लेकर अधिकतम 5 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित कर सकते हैं। सौर ऊर्जा उत्पादक अपने संयंत्रों से उत्पादित बिजली वितरण निगमों को खरीद अनुबंध के माध्यम से निर्धारित दर पर उपलब्ध करा रहे हैं। इस वर्ष फरवरी माह में कुसुम प्लांटों से उत्पादित 4001.29 लाख यूनिट सौर ऊर्जा वितरण निगमों को उपलब्ध हुई। पैदा हो रही बिजली का उपयोग उसी सब स्टेशन पर होने से विद्युत निगमों को अलग से वितरण अथवा प्रसारण तंत्र भी विकसित करने की आवश्यकता नहीं होती। इससे वितरण लॉसेज भी न्यूनतम होते हैं, जिसका लाभ वितरण निगमों को मिलता है।
कुसुम योजना में लग रहे सौर ऊर्जा संयंत्रों से एक हजार से अधिक नए सोलर उद्यमी ऊर्जा उत्पादन से जुड़ चुके हैं और उन्हें आय का अतिरिक्त स्रोत मिला है। इससे उनके आर्थिक जीवन स्तर में सुधार आया है। अनुपजाऊ भूमि का उपयोग सुनिश्चित हुआ है और देश की ऊर्जा सुरक्षा में सर्वसुलभ सौर ऊर्जा का योगदान बढ़ा है।
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