जयपुर , नवम्बर 17 -- राजस्थान में पशुपालन विभाग ने तकनीकी नवाचार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए बीमार पशुओं के उपचार के लिए 'चैटबॉट प्रणाली' की शुरुआत की है और इससे पिछले छह महीने में प्रदेश में 82 हजार 713 पशुपालक इस माध्यम से जुड़ कर सलाह ले चुके हैं और 65 हजार 490 पशुओं को चिकित्सा सहायता दी जा चुकी है।
विभाग के सचिव डाॅ सुमित शर्मा ने सोमवार को बताया कि आने वाले समय में चैटबॉट प्रणाली को कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जोड़ने की योजना है, जिससे पशुओं की बीमारियों का त्वरित विश्लेषण और निदान और भी सटीक हो सकेगा। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने भी राजस्थान के 1962 चैटबॉट मॉडल की सराहना करते हुए इस मॉडल को अपने प्रदेश में अपनाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में कृषि, पशुपालन, डेयरी डवलपमेंट एवं मत्स्य विभाग के उप सचिव एम.बी. माराले ने महाराष्ट्र में संचालित 1962 महापशुधन संजीवनी एप के माध्यम से राजस्थान की तर्ज पर वाट्सएप चैटबॉट की सुविधा शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
पशुपालन विभाग के निदेशक डाॅ आनंद सेजरा ने बताया कि चैटबॉट प्रणाली ने पशु उपचार सेवाओं को अधिक तेज, पारदर्शी और सुलभ बनाया है। इससे न केवल उपचार की प्रक्रिया में तेजी आयी है, बल्कि पशु मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गयी है।
पशुपालन विभाग के इस अभिनव प्रयास से प्रदेशभर में पशुपालकों को बड़ी राहत मिली है। चैटबॉट के माध्यम से ग्रामीण अंचलों से लेकर दूरस्थ क्षेत्रों तकके पशुपालक विभाग से सीधे संवाद स्थापित कर पा रहे हैं। पशु चिकित्सक ऑनलाइन माध्यम से न केवल परामर्श दे रहे हैं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर संबंधित क्षेत्र के पशु चिकित्सालयों को तुरंत सूचना देकर मौके पर इलाज की व्यवस्था भी कर रहे हैं। यह पहल राजस्थान को डिजिटल पशु स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रही है।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय राज्यमंत्री एस पी सिंह बघेल ने पिछले दिनों अपने राजस्थान दोरे के दौरान पशुपालन विभाग राजस्थान के इस नवाचार की सराहना करते हुए इसे अन्य राज्यों में विस्तारित करने योग्य बताया। श्री बघेल ने राजस्थान सरकार के इस नवाचार के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत के अभिनव प्रयासों की सराहना करते हुए अन्य राज्यों के लिए भी चैटबॉट मॉडल को अपनाने की बात कही थी।
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