जयपुर , अप्रैल 15 -- राजस्थान में श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय अधिनस्थ इकाई उद्यानिकी महाविद्यालय एवं राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान दुर्गापुरा में बुधवार को संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती बड़े उत्साह, श्रद्धा एवं गरिमा के साथ मनाई गई।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में महाविद्यालय के वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लेकर बाबा साहेब के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य डॉ. अंबेडकर के विचारों, उनके संघर्षों तथा सामाजिक न्याय के लिए किए गए उनके ऐतिहासिक योगदान को स्मरण करना और नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर के निदेशक (शिक्षा) डॉ. राकेश सम्मौरिया अपने उद्बोधन में डॉ. अंबेडकर के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन संघर्ष, परिश्रम और संकल्प का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने बताया कि अत्यंत विपरीत परिस्थितियों में जन्म लेने के बावजूद डॉ. अंबेडकर ने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और समाज में व्याप्त असमानता एवं भेदभाव के विरुद्ध आजीवन संघर्ष किया।
डॉ समोरिया ने कहा कि आज के दौर में जब समाज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब डॉ. अंबेडकर के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उन्होंने युवाओं को राष्ट्र का भविष्य बताते हुए कहा कि वे डॉ. अंबेडकर के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं ताकि समाज में सकारात्मक परिवर्तन आ सके। उन्होंने शिक्षा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी को अपनाने पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहना चाहिए।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. के. सी. शर्मा, छात्र कल्याण निदेशक ने कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन हमें यह सिखाता है कि कठिनाइयों के बावजूद यदि दृढ़ निश्चय और परिश्रम हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए जो प्रयास किए, वे आज भी हमारे लिए प्रेरणास्रोत हैं।
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