जयपुर , दिसंबर 03 -- लेनोवा कंपनी नई पीढ़ी को भारतीय कला और संस्कृति से जोड़ने के लिए अपनी नई पहल 'मेड विद लेनोवो योगा (ऑरा एडिशन)' की घोषणा के तहत लघु फिल्म के जरिए राजस्थान की समृद्ध कहानी कहने की परंपरा पर आधारित कावड़ कला को नए तरीके से पेश करेगी।
लेनोवो इंडिया की मार्केटिंग डायरेक्टर चंद्रिका जैन ने बताया कि इसके लिए लेनोवो एक चलचित्र लघु फिल्म लॉन्च करेगी जिसमें थ्रीडी, एआई आर्टिस्ट टूसिड और राजस्थान के प्रसिद्ध कावड़ कलाकार अक्षय गांधी नज़र आएंगे। यह फिल्म कावड़ कथा की बारीकियों को दिखाएगी जो लकड़ी की तख्तियों पर बनी होती है जिनको एआई, थ्रीडी और वीएफएक्स की मदद से किस तरह जीवंत और आधुनिक रूप में दिखाया जा सकता है, वह दिखाया जायेगा। यह कावड़ फ़िल्म लेनोवो की तीन फ़िल्मों में से एक है, जिसमें ओडिशा, राजस्थान और कश्मीर की यात्रा को दर्शाया गया है।
राजस्थान की समृद्ध कहानी कहने की परंपरा पर आधारित यह फिल्म में कैसे सदियों पुरानी कावड़ कला, जिसमें लकड़ी की खुलती तख्तियां, कई स्तरों वाली कहानियां और हस्तनिर्मित चित्रकारी को आज की डिजिटल पीढ़ी के लिए नए रूप में पेश किया जायेगा। यात्रा, बोल और कला को करीब से समझने की प्रक्रिया के माध्यम से यह फिल्म एक आधुनिक थ्रीडी / एआई कलाकार और एक पारंपरिक कावड़ कलाकार के अनोखे सहयोग को दर्शायेगा जो राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान में गहराई से जुड़ा हुआ है। कावड़ कहानियों को डिजिटल रूप में जीवंत बनाया गया जहां किरदारों, दृश्यों और लकड़ी के पैनलों को एनीमेशन के जरिए आधुनिक अंदाज़ दिया गया है लेकिन हस्तनिर्मित बनावट की वास्तविकता भी बरकरार रखी है।
उन्होंने बताया कि फिल्म भारत की कलात्मक विरासत, सदियों की मेहनत और कहानी कहने की क्षमता से बनी है। एआई के जरिए इस विरासत को भविष्य में भी जीवित रखा जा सकेगा। 'मेड विद लेनोवो योगा (ऑरा एडिशन)' अभियान का उद्देश्य यही है कि तकनीक परंपरा को बदलने के लिए नहीं बल्कि उसे संरक्षित और साझा करने के लिए इस्तेमाल की जाए। एआई-सक्षम सुविधाओं की मदद से लेनोवो योगा ऑरा एडिशन क्रिएटर्स को नई सीमाएँ पार करने और सांस्कृतिक कहानियों को आज की युवा पीढ़ी की पसंद के हिसाब से नए रूप में पेश करने में सक्षम बनाता है।
राजस्थान के कावड़ कलाकार अक्षय गांधी ने कहा कि कावड़ की हर लकड़ी की तख्ती में सदियों की भावनाएं और पहचान छिपी है। इसे डिजिटल रूप में बदलते देखकर और फिर भी उसकी आत्मा को बचाए रखते हुए देखना, बेहद भावुक अनुभव है। यह सहयोग साबित करता है कि जब तकनीक का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो यह हमारी परंपराओं को और दूर तक ले जा सकते है और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकता हैं।
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