लखनऊ , जनवरी 05 -- राज्यपाल एवं प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा से सोमवार को राजभवन में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल के अंतर्गत कनाडियन हिन्दू चेम्बर्स आफ कामर्स तथा उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों लखनऊ विश्वविद्यालय, डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय एवं ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के मध्य समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

इन एमओयू के माध्यम से छात्र एवं फैकल्टी एक्सचेंज, संयुक्त शोध (ज्वाइंट रिसर्च कोलैबोरेशन), पाठ्यक्रम विनिमय (कोर्स एक्सचेंज) तथा उच्च शिक्षा से जुड़े विविध क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। इस पहल से अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक साझेदारी को मजबूती मिलने के साथ-साथ प्रदेश के विद्यार्थियों और शिक्षकों को वैश्विक अवसर उपलब्ध होंगे।

इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और अब इन्हें उत्कृष्टता के उच्चतम स्तर तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने अपने गुजरात के अनुभव साझा करते हुए कहा कि योजनाबद्ध एवं सकारात्मक सोच के साथ किए गए प्रयास सदैव सार्थक परिणाम देते हैं।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों द्वारा किए जा रहे शैक्षणिक नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि नए सिलेबस, आधुनिक पाठ्यक्रमों तथा नैक और एनआईआरएफ मानकों के अनुरूप किए जा रहे कार्यों से गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार परिलक्षित हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अभी और व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है।

अपने हालिया गुजरात दौरे का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी तथा इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर द्वारा किए जा रहे कार्यों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत "वसुधैव कुटुम्बकम" और भगवान बुद्ध के सिद्धांतों को मानने वाला देश है, ऐसे ही संस्कार आने वाली पीढ़ियों में विकसित किए जाने चाहिए।

इस अवसर पर विशेष कार्याधिकारी, राज्यपाल (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने कहा कि पिछले सात वर्षों में उत्तर प्रदेश ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता के नए आयाम स्थापित किए हैं। वर्तमान में प्रदेश के 10 राज्य विश्वविद्यालयों को नैक की सर्वोच्च 'ए ' रैंकिंग प्राप्त होना इसका प्रमाण है।

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