, April 15 -- 2013 में नीतीश कुमार और भाजपा के संबंधों में खटास का दौर शरू हुआ और नरेंद्र मोदी का नाम 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए संभावित प्रधानमंत्री के रूप में सामने आने के बाद श्री कुमार ने अपनी सेक्युलर छवि बचाने के नाम पर गठबंधन से नाता तोड़ लिया। बिहार में नीतीश की सरकार राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के समर्थन पर चलती रही। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए श्री कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और अपने ही मंत्रिमंडल के साथी एक महादलित नेता जीतनराम मांझी को अपना उत्तराधिकारी बनाया। आगामी विधानसभा चुनाव की चुनौतियों को देखते हुए 22 फरवरी 2015 को वह पुनः मुख्यमंत्री पद पर वापस लौटे और उसी वर्ष महागठबंधन के साथ मिल कर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।

जुलाई 2017 में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण उन्होंने महागठबंधन का साथ छोड़ा और राजग के साथ मिल कर प्रदेश में सरकार बनाई।

2020 के चुनाव में जदयू का प्रदर्शन "चिराग फैक्टर" के कारण कमजोर रहा, लेकिन श्री कुमार मुख्यमंत्री पद पर बने रहे। इसके बाद पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष आर सीपी सिंह को लेकर विवाद हुआ और असमंजस की स्थिति में श्री सिंह पार्टी से निकाले गए। अगस्त 2022 में भाजपा पर "गठबंधन धर्म" का पालन न करने का आरोप लगाते हुए श्री कुमार ने राजग छोड़कर महागठबंधन और यूपीए में वापसी कर ली ।

इसके बाद नीतीश कुमार कुछ समय तक भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता की उम्मीद बने। 23 जून 2023 को पटना में विपक्ष की पहली बड़ी बैठक आयोजित कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसे बाद में "इंडिया ब्लॉक" नाम दिया गया। श्री कुमार बाद में 'इंडिया ब्लाक' में उचित स्थान और सम्मान नहीं मिलने से नाराज़ होकर जनवरी 2024 में फिर राजग में शामिल हो गए और 2024का लोकसभा और 2025 का विधानसभा चुनाव उसी के मिलकर लड़ा।

नीतीश कुमार ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीत के बाद दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और एक कीर्तिमान स्थापित किया।

श्री कुमार मई 2006 से लगातार चार बार बिहार विधान परिषद के सदस्य बने हैं। उनका वर्तमान कार्यकाल मार्च 2024 से शुरू होकर मई 2030 तक निर्धारित था, लेकिन उन्होंने बीच में ही इससे इस्तीफा दे दिया और मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ कर राज्यसभा जाने का फैसला किया।

जहाँ तक राष्ट्रीय राजनीति का सवाल है श्री कुमार ने 1989, 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में लोकसभा चुनाव जीते। 2004 में उन्होंने बाढ़ और नालंदा दोनों सीटों से चुनाव लड़ा, लेकिन केवल नालंदा से उन्हें जीत हासिल हुई।1991 से 93 तक लोकसभा में वह जनता दल के उपनेता थे। श्री कुमार ने 1994 में लालू प्रसाद का साथ छोड़ा और जॉर्ज फर्नांडिस के साथ मिल कर समता पार्टी बनाई थी जो बाद में जदयू में परिवर्तित हुई।श्री कुमार 1989 में केंद्र में विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार में पहली बार किसी राज्य मंत्री बने थे। वर्ष 1998 में अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में उनको रेल मंत्री और 1999 में भूतल परिवहन मंत्री बनने का अवसर मिला। इसके बाद दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने से पहले 2001 से 2004 तक एक बार फिर उन्होंने केंद्र में रेल मंत्री का पद सम्हाला।

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