रायसेन (मध्य प्रदेश) , अप्रैल 11 -- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खेती बाड़ी को अपार संभावनाओं वाला क्षेत्र बताते हुए युवाओं खास कर ग्रामीण युवाओं को कृषि की नमी तकनीकों से जुड़ने का आह्वान करते हुए शनिवार को कहा कि मोदी सरकार कृषि को लाभदायक और सम्मान का पेशा बनाने को प्रतिबद्ध है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे ड्रोन, सेंसर, मोबाइल तकनीक, स्मार्ट फार्मिंग, बिना मिट्टी की खेती, संरक्षित खेती, बागवानी और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप और नवाचार के साथ कृषि से जुड़ें, क्योंकि कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएँ हैं और गाँव का नौजवान जितना जुड़ता जाएगा, उतनी ही नई तकनीक और अधिक आमदनी के रास्ते खुलते जाएँगे।
श्री सिंह यहां शनिवार से प्रारंभ हुए राष्ट्रीय स्तर के 'उन्नत कृषि महोत्सव' 2026 मेले का शुभारंभ करने के बाद लोगोें को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उनके साथ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद थे। यह मेला 13 अप्रैल तक चलेगा।
श्री सिंह ने विश्वास जताया कि यह कृषि मेला किसानों के लिए केवल लाभदायक ही नहीं, बल्कि उनके जीवन की तस्वीर बदलने वाला सिद्ध होगा। उन्होंने कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के कामों का स्वागत करते हुए कहा कि किसान के हित में इतना केंद्रित और विषयगत आयोजन वास्तव में सराहनीय है।
श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा किसानों को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हैं, और यह केवल कहने की बात नहीं, बल्कि पिछले वर्षों में जमीन पर हुए बेमिसाल कार्यों से साबित तथ्य है।
उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कोई दान नहीं, बल्कि किसान का सम्मान है, जिससे वह बीज, खाद और खेत के जरूरी खर्च पूरे कर पाते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को जोखिम भरी खेती के लिए अनमोल सुरक्षा कवच बताया और मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का जिक्र करते हुए कहा कि अब किसान अपनी मिट्टी की जांच कर जमीन की जरूरत के हिसाब से ही खाद डालते हैं, जिससे पैदावार उत्पादन बढ़ती है और लागत कम होती है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि किसान केवल अन्न नहीं उगाता, वह पूरी अर्थव्यवस्था, रोजगार और उद्योग-धंधों को उगाता है, क्योंकि अर्थव्यवस्था के तीनों क्षेत्रों की जड़ें किसान की जमीन से जुड़ी हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि किसान गेहूँ उगाता है, वही गेहूँ ट्रक से मंडी तक जाता है, आटा मिल में प्रोसेस होकर बिस्कुट-ब्रेड फैक्ट्रियों तक पहुँचता है, वहाँ मजदूर और मशीनें काम करते हैं, फिर पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट और दुकानों के जरिए वह उत्पाद उपभोक्ता तक पहुँचता है- यानी अगर किसान गेहूँ ही न उगाए तो पूरी चेन डगमगा जाएगी। उन्होंने कहा कि इसीलिए वे आत्मविश्वास के साथ कहते हैं कि किसान पूरी अर्थव्यवस्था को चलाता है।
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