श्रीनगर , जनवरी 09 -- उत्तराखंड में श्रीनगर के राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट के तत्वावधान में शुक्रवार को "रिसर्च कनेक्ट: ए डिस्कोर्स एंड वर्कशॉप ऑन पब्लिक हेल्थ रिसर्च" का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य जन स्वास्थ्य में अनुसंधान संस्कृति को सुदृढ़ करना, सहयोगात्मक एवं समयबद्ध अनुसंधान परियोजनाओं को प्रोत्साहित करना तथा प्रभावशाली प्रकाशन के लिए शोध डेटा के प्रसंस्करण और विश्लेषण पर संकाय सदस्यों के बीच सार्थक संवाद स्थापित करना रहा।
प्रभावशाली प्रकाशन विषयक सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मेम्फिस के डीन एवं प्रसिद्ध पब्लिक हेल्थ विशेषज्ञ डॉ. आशीष जोशी ने कहा कि समय के साथ मेडिकल शिक्षा का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। आज मेडिकल कॉलेजों में शिक्षा केवल डॉक्टर बनने तक सीमित नहीं रही, बल्कि रिसर्च और प्रैक्टिस के माध्यम से करियर को नई दिशा देने का सशक्त माध्यम बन गई है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में मेडिकल, नर्सिंग और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में रिसर्च शिक्षा का अभिन्न और अनिवार्य हिस्सा है।
डॉ. जोशी ने कहा कि मेडिकल छात्रों को स्वास्थ्य को केवल इलाज तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि समाज, नीति और सार्वजनिक स्वास्थ्य के व्यापक संदर्भ में समझना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल "मैं लोगों की मदद करना चाहता हूँ" यह कहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज के लिए काम करने की सोच स्कूल स्तर से ही विकसित होनी चाहिए। छात्रों को देश या विदेश में अर्जित ज्ञान और अनुभव को उसी समाज के विकास में वापस लाना चाहिए, जिसने उन्हें यह अवसर दिया।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए डॉ. जोशी ने कहा कि सही दिशा और इच्छाशक्ति के साथ ये संस्थान बड़े बदलाव का माध्यम बन सकते हैं। उन्होंने वर्ष 2008 में सामने आई "एक मेडिकल कॉलेज-एक रिसर्च प्रोजेक्ट" की अवधारणा का उल्लेख करते हुए बताया कि आज वे भारत के कई राज्यों में पब्लिक हेल्थ और रिसर्च से जुड़े कार्यों में योगदान दे रहे हैं।
डॉ. जोशी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक मेडिकल छात्र के रूप में उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे अमेरिका के इतिहास में स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के पहले भारतीय-अमेरिकी डीन बनेंगे। उनका पहला लक्ष्य पब्लिक हेल्थ शिक्षा को स्कूल स्तर तक पहुँचाना रहा। उनकी पहल से 12वीं कक्षा के छात्र हाई स्कूल स्तर पर ही विश्वविद्यालय से पब्लिक हेल्थ का अंडरग्रेजुएट सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकते हैं, जो विश्व में एक अनोखा उदाहरण है।
उन्होंने एक मजबूत रिसर्च हब स्थापित करने पर ज़ोर देते हुए कहा कि छात्र और फैकल्टी मिलकर कार्य करें और पब्लिक हेल्थ रिसर्च को करियर के अवसर के रूप में देखें। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि गूगल पर उपलब्ध जानकारी को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं है। किसी भी समस्या के समाधान के लिए मौजूदा शोध, साहित्य और प्रमाणों की गहन समझ आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि रिसर्च की सोच छोटी उम्र से ही विकसित की जा सकती है, जिसका उदाहरण उन्होंने पाँचवीं कक्षा के एक छात्र द्वारा धूम्रपान पर आधारित मराठी पॉडकास्ट शुरू करने के माध्यम से दिया।
इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने डॉ. जोशी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और सहयोग से इस संस्थान में रिसर्च यूनिट की शुरुआत संभव हो सकी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 से इस रिसर्च यूनिट की नींव रखी गई थी और आज इसे औपचारिक रूप से प्रारंभ किया जा रहा है।
डॉ. सयाना ने कहा कि राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर का भौगोलिक स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी गढ़वाल और बागेश्वर सहित पाँच से अधिक जिलों को स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करता है। रिसर्च का मूल उद्देश्य इसी सहयोग को आगे बढ़ाना है। यह पहल एमबीबीएस छात्रों और चिकित्सकों के लिए शोध आधारित गतिविधियों को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गैर-संचारी रोग, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा आपदाओं से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं पर शोध के लिए यह मंच विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होगा।
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