मुंगेर , जनवरी 28 -- बिहार में मुंगेर जिला मुख्यालय से लगभग छह किलोमीटर दूर गर्म झरनों के लिए विश्व विख्यात ऐतिहासिक "सीताकुंड" परिसर में एक फरवरी से शुरू हो रहे माघ मेला की तैयारियां पूर्ण हो चुकी है।

बिहार सरकार ने मुंगेर सीता कुंड में एक माह तक चलने वाले माघ मेला को राजकीय दर्जा प्रदान कर दिया है। सरकार ने सीता कुंड को रामायण सर्किट से जोड़कर इसके विकास के लिए सात करोड़ की राशि भी स्वीकृत कर दी है।

राजकीय दर्जा मिलने के बाद सीता कुंड में माघ मेला की तैयारी प्रशासनिक स्तर पर अब की जा रही है।पूरी दुनिया में मुंगेर सीता कुंड गर्म झरनों के लिए विख्यात है। इस कुंड की विशेषता और रहस्य यह है कि जहां सीता कुंड में वर्ष में सात महीना कुंड का जल खौलता रहता है। इस कुंड के बीस कदम पर अवस्थित रामकुंड, लक्ष्मण कुंड, भारत कुंड और शत्रुघ्न कुंड का जल पूरे वर्ष शीतल बना रहता है। मुंगेर सीता कुंड की इस विचित्रता और विशेषता के कारण न केवल देश से, बल्कि विदेशों के भी पर्यटक यहां वर्ष भर पहुंचते रहते हैं।

सीता कुंड के संबंध में धार्मिक मान्यता यह है कि जब भगवान श्री राम रावण का वध कर अयोध्या लौट रहे थे, तो इस स्थल पर ही माता सीता की अग्नि परीक्षा हुई थी ।अग्नि परीक्षा में माता सीता सकुशल जीवित बच निकली थी। एक माह तक चलने वाले माघ मेला में लगभग तीन लाख श्रद्धालु और पर्यटक सीताकुंड पहुंचते हैं।

मुंगेर के जिला पदाधिकारी निखिल धनराज निप्पणीकर ने आज यहां पत्रकारों को बताया कि सीता कुंड परिसर में शुरू हो रहे माघ मेला में आने वाले तीन लाख श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा की पूरी व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने माघ मेला आयोजन समिति के पदाधिकारी और सदस्यों के साथ भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के संबंध में बैठक की है।

सीता कुंड के पुजारी सीता कुंड की धार्मिक मान्यता के संबंध में बताते हैं कि यहां माता सीता की अग्नि परीक्षा हुई थी। अग्नि परीक्षा में माता-पिता सुरक्षित बच निकली थीं।माता सीता के ही आशीर्वाद से यह स्थल गर्म झरनों के कुंड के रूप में उपस्थित हो गया।

आज तक देश के किसी वैज्ञानिक ने यह नहीं पता लगा सके हैं कि आखिर एक ही परिसर के चार कुंडों में पूरे वर्ष भर शीतल जल रहता है जबकि 20 कदम की दूरी पर सीता कुंड का जल वर्ष में सात महीना खौलता रहता है। हिंदू धर्म के पुजारी और भक्त माता सीता का आशीर्वाद और उनका चमत्कार इसे मानते हैं।

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