रांची , फरवरी 05 -- झारखंड में लंबे इंतजार के बाद नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
मेयर पद समेत पार्षद पद के सभी प्रत्याशियों ने अपने-अपने नामांकन पत्र दाखिल कर दिए हैं। भले ही ये चुनाव दलगत आधार पर नहीं हो रहे हों, लेकिन चुनावी मैदान में राजनीतिक दलों की सक्रियता साफ तौर पर दिखाई दे रही है। इसी बीच राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की खामोशी ने सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
रांची नगर निगम के मेयर पद के लिए भारतीय जनता पार्टी ने तीन बार की पार्षद रौशनी खलखो को अपना समर्थित उम्मीदवार घोषित किया है। उनके नामांकन के दौरान पार्टी के कई विधायक और वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
वहीं कांग्रेस ने पूर्व मेयर रमा खलखो पर एक बार फिर भरोसा जताया है। उनके नामांकन के मौके पर राज्य सरकार के मंत्री समेत पार्टी के कई बड़े नेता उपस्थित रहे।
हालांकि, चुनावी सरगर्मी के बीच झामुमो ने अब तक रांची मेयर पद के लिए किसी भी समर्थित प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। पार्टी की यह चुप्पी राजनीतिक चर्चाओं का विषय बनी हुई है।
नामांकन के अंतिम दिन झामुमो से जुड़े कुल छह नेताओं ने मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल कर अपनी दावेदारी पेश की। इनमें रामशरण तिर्की, सुजीत कुमार कुजूर, अजीत लकड़ा, बीरू तिर्की, आनंद कुजूर और सुजीत विजय शामिल हैं। बावजूद इसके, पार्टी की ओर से इनमें से किसी को भी आधिकारिक समर्थन नहीं दिया गया है।
झामुमो की इस रणनीतिक चुप्पी को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी रांची मेयर पद पर कांग्रेस को समर्थन दे सकती है। इस संबंध में झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडे ने बताया कि नगर निकाय चुनाव को लेकर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा लिया जाएगा। फिलहाल पार्टी ने किसी भी नेता को महापौर पद का आधिकारिक प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।
वहीं, झामुमो के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में जिला समिति के नेताओं के साथ बैठक कर चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई थी, लेकिन मेयर पद को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका। सूत्रों के अनुसार, पार्टी को रांची में ऐसा मजबूत चेहरा नहीं मिल पाया, जिस पर सर्वसम्मति बन सके।
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