रांची , अप्रैल 05 -- झारखंड में राजधानी रांची समेत पूरे ईस्टर का पर्व आज हर्षोल्लास और गहरी आस्था के साथ मनाया गया।
मसीही समुदाय के लोगों ने प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान की स्मृति में विशेष प्रार्थनाएं अर्पित कीं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, क्रूस पर चढ़ाए जाने के तीसरे दिन प्रभु यीशु मृतकों में से पुनर्जीवित हुए थे। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु सुबह तड़के ही सीएनआई चर्च, कांटाटोली स्थित कब्रिस्तान और जीईएल चर्च के कब्रिस्तानों में एकत्रित हुए। यहां उन्होंने अपने पूर्वजों की कब्रों पर फूल अर्पित कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
सुबह करीब 3 बजे से ही कब्रिस्तानों में श्रद्धालुओं का जुटना शुरू हो गया था। परिवार के दिवंगत सदस्यों को याद करते हुए लोगों ने विनती प्रार्थनाएं कीं और मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
गिरजाघरों में मध्यरात्रि पास्का जागरण की धर्मविधि संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। रांची के अलावा खूंटी, सिमडेगा, गुमला और दुमका सहित राज्यभर के चर्चों में भी विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं।
ईसाई धर्मावलंबियों के अनुसार, गुड फ्राइडे के तीसरे दिन प्रभु यीशु के पुनर्जीवित होने की घटना अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। यही कारण है कि ईस्टर को नवजीवन, आशा और विश्वास का पर्व माना जाता है।
ईस्टर के अवसर पर कब्रिस्तानों में भी विशेष धर्मविधि अर्पित की गई। बिशप और पादरियों की उपस्थिति में सामूहिक प्रार्थनाएं की गईं, जिसमें मृत आत्माओं की शांति और मोक्ष की कामना की गई।
ईस्टर या पास्का पर्व मसीह के प्रेम, दया, आस्था और पुनरुत्थान का प्रतीक है। यह पर्व लोगों को जीवन में आशा, विश्वास और नई शुरुआत का संदेश देता है।
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