रांची, 25अक्टूबर (वार्ता) झारखंड की राजधानी रांची में जिला प्रशासन ने एनडीएमए द्वारा जारी दिशा-निर्देश का सुनिश्चित रूप से पालन करने की अपील की है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), भारत सरकार, नई दिल्ली ने आगामी त्योहारों जैसे दीपावली, छठ पूजा एवं अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान पूजा स्थलों, नदी तटों, सार्वजनिक स्थलों एवं बाजारों जैसे अत्यधिक भीड़ वाले क्षेत्रों में होने वाली दुर्घटनाओं, भगदड़, अग्नि कांड (आतिशबाजी एवं अन्य कारणों से) तथा डूबने जैसी घटनाओं के जोखिमों को न्यूनतम करने हेतु व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके अतिरिक्त, शीत ऋतु के आगमन के साथ हीटिंग उपकरणों से उत्पन्न होने वाले अग्नि खतरे, कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता तथा संवेदनशील समूहों (बुजुर्गों, बच्चों एवं बेघर व्यक्तियों) के लिए विशेष सावधानियों पर बल दिया गया है।

जिला प्रशासन ने छठ पर्व में सभी श्रद्धालुओं से अपील करते कहा की सुरक्षा के साथ उत्सव मनाये। हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि ये दिशा-निर्देश अपनाकर न केवल स्वयं को सुरक्षित रखें, बल्कि अपने परिवार एवं समुदाय की रक्षा करें।

एनडीएमए द्वारा जारी दिशा-निर्देश निम्नानुसार हैं, जो भीड़ प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा, जल सुरक्षा एवं शीतकालीन सावधानियों पर आधारित हैं। ये दिशा-निर्देश एनडीएमए की 'मास गेदरिंग एट इवेंट्स एंड वेन्यूज' गाइडलाइंस, 'फायर सेफ्टी' दिशा-निर्देशों तथा सामान्य आपदा प्रबंधन सिद्धांतों पर आधारित हैं।

भीड़ प्रबंधन एवं भगदड़ रोकथाम (पूजा स्थलों, नदी तटों, बाजारों एवं सार्वजनिक स्थलों पर) एनडीएमए की 'क्राउड मैनेजमेंट' गाइडलाइंस के अनुसार, अत्यधिक भीड़ वाले क्षेत्रों में दुर्घटनाओं एवं भगदड़ को रोकने के लिए निम्न उपाय अपनाएं। आयोजकों को पूर्व-अनुमति लें एवं भीड़ क्षमता का आकलन करें। प्रवेश,निकास मार्ग स्पष्ट रखें एवं वैकल्पिक रूट्स चिह्नित करें।

सीसीटीवी, ड्रोन एवं वॉकी-टॉकी से निगरानी करें। स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं एनजीओ को शामिल करें।

लोगों को भीड़ के प्रकार (स्थिर,गतिशील) के बारे में जागरूक करें। आपातकालीन निकास संकेत लगाएं एवं प्राथमिक चिकित्सा किट उपलब्ध रखें।

नदी तटों पर रेलिंग लगाएं, बाजारों में एक-तरफा प्रवाह सुनिश्चित करें। बच्चों एवं बुजुर्गों के लिए अलग क्षेत्र निर्धारित करें। शराब का सेवन न करें, धक्का-मुक्की से बचें, एवं भीड़ में फिसलन भरी सतहों पर सतर्क रहें। एनडीएमए की 'फायर सेफ्टी' गाइडलाइंस के अनुरूप, आतिशबाजी एवं दीयों से उत्पन्न अग्नि जोखिमों को कम करने के लिए केवल प्रमाणित पटाखों का उपयोग करें। खुले मैदानों में ही जलाएं, घरों,वाहनों से 50 मीटर दूर। साइड से प्रज्वलित करें एवं पानी का बाल्टी तैयार रखें।

अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) उपलब्ध रखें। धुआं अलार्म लगाएं, जो जीवित रहने की संभावना 50% बढ़ाते हैं।

बच्चों को पटाखों से दूर रखें, कॉटन वस्त्र पहनाएं एवं पर्यवेक्षण सुनिश्चित करें।

बंद स्थानों में पटाखे न फोड़ें, शराब पीकर न जलाएं, एवं जले हुए अवशेषों को तुरंत पानी में डुबोएं।

त्योहारों के दौरान नदी,तालाब तटों पर स्नान,पूजा के समय डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए एनडीएमए की सामान्य जल सुरक्षा सिफारिशें।

सभी को लाइफ जैकेट पहनने का निर्देश दें, विशेषकर बच्चों एवं अक्षम व्यक्तियों को।

लाइफ गार्ड तैनात करें, गहराई चिह्नित करें एवं खतरनाक घाटों पर चेतावनी बोर्ड लगाएं।

शराब से परहेज करें, अकेले न स्नान करें। संवेदनशील समूहों के लिए अलग सुरक्षित क्षेत्र बनाएं।

बचाव दल (एनडीआरएफ,स्थानीय टीमें) तैनात रखें एवं प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण लें।

अंधेरे में या तेज धारा में न उतरें, एवं अतिवृष्टि के बाद जलस्तर की जांच करें।

शीत ऋतु में हीटिंग डिवाइसेज (अंगीठी, हीटर, जनरेटर) से अग्नि एवं कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ) विषाक्तता के खतरे को देखते हुए हीटिंग उपकरणों को ज्वलनशील वस्तुओं से 1 मीटर दूर रखें। इलेक्ट्रिक हीटर्स की वायरिंग जांचें एवं ओवरलोड से बचें।

सीओ डिटेक्टर लगाएं (बैटरी चेक करें)। कमरे में हवा का संचार सुनिश्चित करें, बंद दरवाजे-खिड़कियां न रखें।

बुजुर्गों,बच्चों,बेघरों को गर्म वस्त्र दें, सामूहिक आश्रय स्थल उपलब्ध कराएं। सिरदर्द,उल्टी जैसे लक्षणों पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

जनरेटर को घर के बाहर रखें, ईंधन रिसाव रोकें। बंद कमरों में अंगीठी न जलाएं, एवं ईंधन से भरे उपकरण सोते समय न छोड़ें। जिला प्रशासन ने अपील करते हुए कहा आयोजक एवं नागरिक इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।

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