बैतूल , मार्च 23 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां सीमित संसाधनों में जीवन गुजारने वाले एक रसोइये के परिवार ने कड़ी मेहनत और लगन से सफलता की नई मिसाल कायम की है।

जनजातीय कार्य विभाग के आदिवासी बालक छात्रावास पाढर में वर्षों तक रसोइया के रूप में कार्यरत रहे शेषराव पाटील के बड़े बेटे का चयन भारतीय रेलवे में जूनियर इंजीनियर (जेई) के पद पर हुआ है। इससे न केवल परिवार, बल्कि पूरे गांव में खुशी का माहौल है।

आमतौर पर निम्न और मध्यम वर्गीय परिवारों का सपना होता है कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर अपने पैरों पर खड़े हों और सरकारी सेवा में जाकर परिवार का नाम रोशन करें। इसी सपने को साकार करने के लिए शेषराव पाटील ने वर्षों तक संघर्ष किया। सीमित आय और अभावों के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा में कभी कमी नहीं आने दी।

करीब 20 साल पहले शेषराव पाटील ने जनजातीय कार्य विभाग के छात्रावास में रसोइया के पद पर नौकरी शुरू की थी। इस छोटी सी नौकरी के सहारे उन्होंने अपने परिवार का भरण-पोषण किया और बच्चों को पढ़ाने में हर संभव प्रयास किया। तीन साल पहले वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनकी पत्नी सरस्वती पाटील गृहिणी हैं। पाटील दंपति के तीनों बच्चों ने भी अपने माता-पिता के संघर्ष को समझते हुए पढ़ाई में जी-तोड़ मेहनत की और सफलता हासिल की। बड़े बेटे प्रीतम पाटील का चयन मध्य रेलवे के मुंबई जोन में जूनियर इंजीनियर (सिविल) के पद पर हुआ है। वे रविवार को पाढर से मुंबई के लिए रवाना हुए, जहां वे ज्वाइन करेंगे।

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