अम्बिकापुर , नवंबर 04 -- छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित रजत महोत्सव राज्योत्सव कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) का स्टॉल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस स्टॉल पर जिले के विभिन्न क्लस्टरों से जुड़ी स्व-सहायता समूह (एसएचजी) की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए ग्रामीण उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की जा रही है।

स्टॉल में कच्ची घानी सरसों तेल, बांस से बने सुपा, पापड़, हल्दी-मिर्च पाउडर, मल्टीग्रेन आटा, सरपबती गेहूं का आटा, रागी का आटा, बेसन, और मक्का का आटा जैसे शुद्ध और पारंपरिक उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। सभी उत्पाद पूरी तरह महिलाओं द्वारा स्थानीय संसाधनों से तैयार किए गए हैं, जो न केवल गुणवत्ता में बेहतर हैं बल्कि ग्रामीण स्वावलंबन और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने का भी प्रतीक हैं।

स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि अब तक लगभग 21 हजार रुपए की बिक्री हो चुकी है। आगंतुक इन उत्पादों की गुणवत्ता और पैकेजिंग की सराहना करते हुए इनके निर्माण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ले रहे हैं। महिलाओं ने बताया कि बिहान योजना के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण, विपणन सहायता और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। पहले वे केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, पर अब अपने उत्पादों से आय अर्जित कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।

समूह की सदस्य ममता ने बताया कि बिहान योजना ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मविश्वास और पहचान दी है। राज्योत्सव जैसे बड़े मंच पर उनके उत्पादों को स्थान मिलना गर्व का विषय है। आगंतुकों ने भी महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाते हैं और महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम हैं।

यह स्टॉल न केवल महिलाओं की मेहनत और आत्मनिर्भरता की मिसाल है, बल्कि "नवा छत्तीसगढ़" के उस विजन को भी साकार कर रहा है, जहां हर महिला आर्थिक रूप से सशक्त और समाज के विकास में सहभागी बने।

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