नयी दिल्ली , जनवरी 01 -- रक्षा मंत्रालय ने 'सुधारों के वर्ष 2025' में रक्षा तैयारियों को पुख्ता बनाने के लिए तीनों सेनाओं के लिए 3.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक के खरीद सौदों को मंजूरी दी और मौजूदा वित्त वर्ष में अब तक 1.82 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि रक्षा मंत्रालय ने बीते वर्ष सेनाओं में संयुक्तता को मजबूत करने, रक्षा तैयारियों को सुदृढ़ करने, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और कल्याणकारी प्रणालियों में सुधार के उद्देश्य से व्यापक सुधारों के कार्यान्वयन में उल्लेखनीय प्रगति की। मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली रक्षा खरीद परिषद ने देश की रक्षा तैयारियों को बढ़ाने के उद्देश्य से बीते वर्ष जनवरी से लेकर दिसम्बर तक 3.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों को स्वीकृति दी जिसमें स्वदेशीकरण के माध्यम से आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया गया है।
रक्षा मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 में दिसंबर के अंत तक सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए 1.82 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं।
मंत्रालय ने दिसंबर के अंत तक पूंजीगत अधिग्रहण बजट के अंतर्गत लगभग 80 प्रतिशत, यानी करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये का व्यय किया है। इसका इस्तेमाल सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए किया गया है। रक्षा मंत्रालय का कुल पूंजीगत व्यय भी 76 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिसमें पूंजीगत अधिग्रहण के अतिरिक्त अवसंरचना, भूमि, अनुसंधान एवं विकास आदि पर किया गया व्यय शामिल है।
रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने और आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई गई है। इसके तहत रक्षा विनिर्माण लाइसेंसों को सरल बनाया गया है, लघु इकाईयों की क्षमताओं को चिन्हित किया गया है और रक्षा खरीद में मांग-आपूर्ति विश्लेषण को बेहतर बनाने के लिए मार्केट इंटेलिजेंस रिपोर्ट तैयार की गई हैं। इसके अतिरिक्त, परीक्षण और ट्रायल अवसंरचना प्रयोगशालाओं को निजी क्षेत्र के साथ साझा किया जा रहा है। नवाचार को प्रोत्साहित करने और रक्षा क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए रक्षा अनुसंधान अनुदानों का 25 प्रतिशत हिस्सा निजी क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थानों और एमएसएमई को आवंटित किया गया है।
समय-सीमा को कम करने के लिए खरीद प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। इसमें आई डेक्स मैनुअल का सरलीकरण, रक्षा निर्यात अनुमतियों का युक्तिकरण, रक्षा एक्सिम पोर्टल का पुनर्गठन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण नीति का सरलीकरण तथा संशोधित वित्तीय अधिकार प्रत्यायोजन और खरीद मैनुअलों के माध्यम से विकेंद्रीकरण शामिल है। रक्षा खरीद मैनुअल 2025 को नवंबर से लागू किया गया है।
सशस्त्र बलों के संयुक्त संचालन नियंत्रण केंद्र की स्थापना, सशस्त्र बलों के लिए विजन 2047 का प्रकाशन, भविष्य संचालन विश्लेषण समूह का गठन, संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और एकीकृत क्षमता विकास योजना का अंतिम रूप देना विभिन्न चरणों में है। इस दिशा में उठाए गए कदमों का लाभ ऑपरेशन सिंदूर की योजना और क्रियान्वयन के दौरान देखने को मिला।
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