नासिक , मई 02 -- महाराष्ट्र में नासिक की एक अदालत ने नासिक टीसीएस में कथित यौन शोषण और धर्म परिवर्तन मामले में मुख्य संदिग्ध निदा खान की अग्रिम जमानत याचिका नामंजूर कर दी है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के.जी. जोशी ने मामले की सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दी।

पिछले सप्ताह हुई सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक और जांच अधिकारियों ने अपनी दलीलों में अदालत के सामने कई चौंकाने वाले खुलासे किये थे। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने निदा खान और उसके साथियों के खिलाफ बेहद गंभीर प्रकृति के सबूत पेश किये।

नासिक टीसीएस में चल रहे धर्म परिवर्तन रैकेट की कथित 'मास्टरमाइंड' निदा फिलहाल गर्भवती बतायी जा रही है। इसी आधार पर उसने अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था। इस बीच निदा खान इस मामले में फरार चल रही है और नासिक पुलिस ने उसे खोजने के लिए विशेष टीमें तैनात की हैं।

पुलिस के अनुसार, निदा खान और अन्य आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़ित महिला को धर्म परिवर्तन के लिए 'बुर्का' उपलब्ध कराया था। इसके अलावा उसे पैगंबर मोहम्मद से जुड़ी और इस्लामी आस्था की जानकारी वाली एक किताब भी दी गयी थी। पीड़िता को भेजे गये धार्मिक उपदेशों वाले यूट्यूब लिंक, इंस्टाग्राम लिंक, रील्स और वीडियो आरोपी ने कहां से प्राप्त किये, इसकी जांच अभी लंबित है। आरोप है कि निदा खान समय-समय पर पीड़िता को धार्मिक निर्देश देती थी। वह शिकायतकर्ता को अपने घर ले जाती थी और उसे नमाज पढ़ना तथा हिजाब और बुर्का सही तरीके से पहनना सिखाती थी।

पुलिस ने अदालत से जमानत याचिका खारिज करने का अनुरोध करते हुए तर्क दिया कि निदा खान और अन्य आरोपियों ने एक-दूसरे के साथ साजिश रचकर इस अपराध को अंजाम दिया है। विशेष रूप से, आरोपी दानिश शेख ने 'मालेगांव पार्टी' की ओर से पीड़िता का नाम बदलने के इरादे से उसके शैक्षिक और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए थे। परिणामस्वरूप, आरोपी के माध्यम से इस 'मालेगांव पार्टी' के संबंध में जांच की जानी आवश्यक है।

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