पटना, नवंबर 16 -- भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिनवादी (भाकपा-माले) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने रविवार को कहा कि योजनाओं के नाम पर मतदाताओं को नकद लाभ देना राजनीतिक और संस्थागत भ्रष्टाचार है और यह प्रवृत्ति हाल ही में संपन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव के अलावा महाराष्ट्र तथा कुछ अन्य राज्यों में भी देखी गई थी।

श्री भट्टाचार्य ने कहा कि यदि चुनाव लड़ने का यही तरीका जारी रहा तो विपक्ष के लिए देश के किसी भी राज्य में चुनाव जीतना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय मतदाताओं को नगद पैसे देने से लोकतंत्र का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

भाकपा-माले महासचिव ने बिहार विधानसभा चुनाव की चर्चा करते हुए कहा कि बिहार में सरकार ने रोजगार के नाम पर महिलाओं के खाते में दस हजार रूपये भेज कर मतदान का पूरा खेल बदल दिया। उन्होंने कहा को इसके साथ ही वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाकर 400 से 1100 कर दी गयी, जीविका समूह की महिलाओं को लाभ दिया गया। उन्होंने कहा कि जिस महिला को गुजरे के लिए उसका बेटा 100 भी नहीं देता, उसे कोई सरकार 1100 देने का वादा करें, तो मतदान में फर्क तो पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यही मांग विपक्ष लंबे समय से कर रहा था, तब सरकार ने ध्यान नहीं दिया, लेकिन चुनाव के कुछ हफ्ते पहले ऐसी घोषणाएं कर मतदान को प्रभावित किया गया।

श्री भट्टाचार्य ने कहा कि 2010 के बाद विपक्ष का यह सबसे खराब प्रदर्शन है। उन्होंने कहा कि 2010 में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को सिर्फ 22 सीटें मिली थी, कांग्रेस ने चार जीती थी और भाकपा-माले को कोई सीट नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि 2010 में विपक्ष बंटा हुआ था, इसलिये परिणामों के पीछे एक वजह भी थी, लेकिन इस बार वर्ष 2025 में कुछ सीटों पर दोस्ताना लड़ाई छोड़कर, बाकी जगहों पर महागठबंधन एकजुट होकर चुनाव में उतरा था, फिर भी इस तरह के परिणाम आश्चर्य में डालते हैं।

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