, April 15 -- मुख्यमंत्री ने कहा इमर्जिंग टेक्नोलॉजी कृषि क्षेत्र में बहुत लाभकारी बन रही है। रियल टाइम डेटा से किसान जान सकते हैं कि उनके खेत में कब और कितने उर्वरक और सिंचाई की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यूपी में 2017 के पहले कृषि विकास दर 6 से 7 प्रतिशत थी जो अब बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है। यदि इमर्जिंग टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल हो तो इसे 30 प्रतिशत तक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सबसे उर्वरा भूमि और सिंचाई के साधन यूपी में हैं। प्रौद्योगिकी का सही प्रयोग कर बहुत से किसान बहुत अच्छा लाभ प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कृषि क्षेत्र में ड्रोन दीदी की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि ड्रोन दीदी 10 मिनट में एक एकड़ खेत में दवा का छिड़काव कर सकती है जो मैनुअली संभव नहीं है।

योगी ने कहा कि क्षेत्र के हिसाब से अलग अलग इमर्जिंग टेक्नोलॉजी के हब और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए जा रहे हैं। इसी क्रम में आगरा में आलू का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जा रहा है। कन्नौज और बस्ती में फल एवं सब्जी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान में चावल का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया गया है। वहां एक हेक्टेयर खेत में 100 क्विंटल उत्पादन में सफलता मिली है जो पारंपरिक उत्पादन 40 क्विंटल से ढाई गुना अधिक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य में इमर्जिंग टेक्नोलॉजी की बेहद कारगर भूमिका हो सकती है। उन्होंने बताया कि 2017 के पहले प्रदेश में स्कूलों से बालिकाओं का ड्राप आउट रेट 19 से 20 प्रतिशत था। कई उपायों से भी इसमें अपेक्षित कमी नहीं आ रही थी। जब टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर कारणों का पता लगाया गया और उसके अनुरूप शुद्ध पेयजलए शौचालय आदि की व्यवस्था की गई तो ड्राप आउट रेट घटकर 3 प्रतिशत पर आ गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में टेली कंसल्टेशन काफी महत्वपूर्ण है। इससे मरीज को देश और दुनिया के एक्सपर्ट से बीमारी के इलाज में सलाह मिल सकती है। इसी तरह मेडिकल उपकरणों, दवाओं और ब्लड को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में ड्रोन का इस्तेमाल हो सकता है।

एमजीयूजी में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश की परिकल्पना को साकार करने के अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। अलग अलग क्षेत्रों में एआई के प्रभाव की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि एआई का सबसे बड़ा प्रभाव हेल्थकेयर में देखने को मिलेगा।

टाटा संस के चेयरमैन ने कहा कि भविष्य में एआई हर समस्या का समाधान प्रस्तुत करेगी। एआई से कई दवाओं के निर्माण में मदद मिल रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि अगले कुछ दशक में एआई के सहयोग से उन बीमारियों के लिए भी दवा बन सकेगीए जिन्हें अभी लाइलाज मान लिया गया है। डायबिटीज और हर तरह के कैंसर के इलाज में भी एआई से चमत्कारिक मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि मेडिकल साइंस की प्रगति से मानव जीवन प्रत्याशा बढ़ी है। एआई के बेहतर प्रयोग से यह और भी बढ़ेगी।

श्री चंद्रशेखरन ने कहा कि आगामी समय में भारत में एआई से जुड़े अविष्कार बड़ी संख्या में होंगे। यहां समस्याएं हैं तो उनका समाधान करने के लिए प्रतिभा भी मौजूद है। जरूरत उस प्रतिभा को समय के अनुरूप प्रौद्योगिकी से जोड़ने की है। यही प्रतिभा नए अविष्कार कर समस्या का समाधान करेगी। उन्होंने जीवन के हरेक क्षेत्र को एआई से जोड़ने और प्रतिभा उन्नयन में निवेश पर जोर दिया।

एमजीयूजी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गिनीज रिकार्ड एआई फॉर आल अवेयरनेस कार्यक्रम में योगदान देने वाले विद्यार्थियों और हैकाथॉन के विजेताओं को सम्मानित किया। साथ ही उन्होंने एआई फॉर फार्मर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़े 5 किसानों को प्रमाण पत्र वितरित किए। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के समक्ष एमजीयूजी और सेंटर ऑफ मेडिकल इनोवेशन गवर्नमेंट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ग्रेटर नोएडा के साथ एक एमओयू का भी आदान प्रदान हुआ।

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