लखनऊ , दिसंबर 08 -- उत्तर प्रदेश में मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ी पहल की है। उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025 में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के गठन के बाद प्रथम चरण में देश के 10 राज्यों में यह योजना लागू की गई है, जिनमें उत्तर प्रदेश भी शामिल है। प्रदेश में इस योजना का क्रियान्वयन उद्यान विभाग द्वारा किया जाएगा।
सोमवार को लखनऊ स्थित आवास पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होने कहा कि यह योजना किसानों को उच्च मूल्य वाली फसल से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी और उत्तर प्रदेश को 'उत्तम प्रदेश' बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तैयार कार्ययोजना को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है और 158 लाख रुपये की धनराशि जारी कर दी गई है। इस बजट से मखाना खेती हेतु तालाबों का चयन व निर्माण, किसानों का विशेष प्रशिक्षण, बायर-सेलर मीट, मखाना पवेलियन के माध्यम से प्रचार-प्रसार, व्यापारियों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी, जनपद व राज्य स्तरीय सेमिनार जैसी गतिविधियाँ संचालित की जाएंगी।
दिनेश प्रताप सिंह ने बताया कि "सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मखाना" स्थापित करने की दिशा में भी कार्य शुरू कर दिया गया है, जिससे अनुसंधान और तकनीक आधारित उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। उद्यान मंत्री ने कहा कि मखाना औषधीय गुणों और उच्च बाजार मूल्य के कारण सुपरफूड के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। अब तक इसकी खेती मुख्यतः बिहार में होती थी, लेकिन उत्तर प्रदेश की जलवायु और जलभराव वाली भूमि इस फसल के अनुकूल है।
उन्होंने कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, गाजीपुर, बलिया, महाराजगंज, वाराणसी और बस्ती को मखाना उत्पादन के लिए विशेष रूप से उपयुक्त जनपद बताया गया। जहां सिंघाड़े की खेती होती है, वहाँ मखाना उत्पादन भी सफल रहेगा। उन्होंने कहा कि अगले वित्तीय वर्ष में मखाना क्षेत्र विस्तार, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री का उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन कार्यों को और व्यापक स्तर पर शुरू किया जाएगा।
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