वाराणसी , फरवरी 3 -- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की नई नियमावली पर उच्चतम न्यायालय की रोक के बीच मंगलवार को काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के छात्र-छात्राओं ने यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता के संवर्धन) विनियम, 2026 के समर्थन में मार्च निकाला। छात्र विश्वनाथ मंदिर परिसर से जुटे और महिला महाविद्यालय तक रैली निकालकर पोस्टर-बैनर के साथ धरने पर बैठ गए। स्थिति को देखते हुए कई थानों की फोर्स, पुलिस अधिकारी, बीएचयू प्रॉक्टोरियल बोर्ड और सुरक्षाकर्मी मौके पर तैनात रहे।

छात्रों का कहना था कि यह मार्च एससी, एसटी, ओबीसी, महिला और दिव्यांग छात्रों के नेतृत्व में भेदभाव-रोधी नियमों और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल की मांग को लेकर निकाला गया है। प्रदर्शनकारियों ने परिसर में वितरित पत्र में उच्च शिक्षण संस्थानों में कथित संरचनात्मक जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए और प्रवेश, मूल्यांकन, शोध, फेलोशिप, हॉस्टल आवंटन व नियुक्तियों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की।

छात्र जितेंद्र यादव ने कहा कि नई नियमावली असमानता दूर करने की दिशा में अहम कदम है। वहीं एससी/एसटी/ओबीसी एकता मंच के मनीष चौधरी ने ओबीसी को शामिल किए जाने को उचित बताया। पूर्व छात्र संदीप पटेल ने विश्वविद्यालय में समानता समिति के गठन, प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने और शिकायत प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग उठाई।

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