नैनीताल , मार्च 24 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) में लंबे समय से कार्यरत सहायक प्राध्यापकों के विनियमितकरण और न्यूनतम वेतनमान के मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए सरकार को जल्द फैसला लेने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में मंगलवार को मनीषा पंत, डॉ. पूजा जुयाल, बालम सिंह दफोटी समेत पांच सहायक प्राध्यापकों के मामले में सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार वह विश्वविद्यालय में पिछले करीब 15 वर्षों से कार्यरत हैं। उन्हें अब तक न तो न्यूनतम वेतनमान दिया गया है और न ही उनका विनियमितकरण किया गया है।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इस संबंध में वे कई बार प्रत्यावेदन दे चुके हैं लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कहा गया कि इस संबंध में शासन को संस्तुति भेजी गई है। साथ ही पद सृजन का प्रस्ताव भी दिया गया है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत से न्यूनतम वेतनमान दिलाने और विनियमितकरण की मांग की गई है। सुनवाई के बाद खंडपीठ ने सभी याचिकाओं को निस्तारित करते हुए प्रदेश सरकार याचिकाकर्ताओं के मामले में जल्द निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित