गोरखपुर , दिसंबर 05 -- उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित मिशन मंझरिया एक गांव के कायाकल्प का ऐसा अभियान जिसने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी अपना मुरीद बना लिया है।
महाराणा प्रताप महाविद्यालय जंगल धूसढ़ के बीएड विभाग की तरफ से गोद लिए गए इस गांव में बीएड के छात्राध्यापकों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और शासन की योजनाओं से संतृप्त करने की दिशा में सेवा की नजीर पेश की है।
मुख्यमंत्री योगी ने गुरुवार को महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक समारोह के उद्घाटन कार्यक्रम में मिशन मंझरिया के रूप में महाराणा प्रताप महाविद्यालय की सेवा साधना को गांव के प्रति संस्था की जिम्मेदारी के .मॉडल स्टडीष्.के रूप में खूब सराहा।
योगी ने गुरुवार को महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह शुभारंभ समारोह में महाराणा प्रताप महाविद्यालय जंगल धूसढ़ के मिशन मंझरिया की प्रगति रिपोर्ट स्मारिका का विमोचन करते हुए कहा था कि गांव के प्रति किसी शैक्षिक संस्था की जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए मिशन मंझरिया इसके लिए एक मॉडल स्टडी है। उन्होंने निरक्षरता मिटाने और स्वालम्बन की राह दिखाने के लिए महाराणा प्रताप महाविद्यालय को योजक की भूमिका का सच्चा निर्वहन करने वाला बताया और मिशन मंझरिया को सभी संस्थाओं के लिए अनुकरणीय बताया।
मिशन मंझरिया को मुख्यमंत्री से मिली सराहना को लेकर महाराणा प्रताप महाविद्यालय जंगल धूसढ़ के प्राचार्य डॉ. प्रदीप कुमार राव का कहना है कि मिशन मंझरिया की शुरुआत गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ही प्रेरणा से हुई थी। उनकी प्रेरणा से ही महाविद्यालय ने समीप के गांवों को गोद लेकर ग्रामीणों की शैक्षिकए चिकित्सकीय सेवा और उन्हें आत्मनिर्भरता की राह दिखाने की शुरुआत मिशन मोड में की। इसमें 2018 से वर्तमान समय तक मिशन मंझरिया बीएड विभाग की अद्वितीय उपलब्धि है। यह मिशन एक गांव में आठ प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से आत्मनिर्भर गांव से आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने में जुटा है।
मुख्यमंत्री द्वारा मिशन मंझरिया का उल्लेख करने के बाद अब सभी लोग इस मिशन के बारे में जानने को उत्सुक हैं। महाराणा प्रताप महाविद्यालय जंगल धूसढ़ में बीएड विभाग की अध्यक्ष शिप्रा सिंह के अनुसार मंझरिया गांव में 178 परिवारों के अंतर्गत 843 की आबादी है। प्रत्येक परिवार को न सिर्फ मिशन के मूल उद्देश्यों से जोड़ा गया है बल्कि उन्हें पात्रता के अनुसार केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं से भी आच्छादित कराया गया है।
मिशन मंझरिया के तहत महाराणा प्रताप महाविद्यालय जंगल धूसढ़ के बीएड विभाग के छात्राध्यापक पढ़ाई के बाद प्रतिदिन अपराह्न 2 बजे से 4 बजे तक मंझरिया गांव को अपना कर्मक्षेत्र बनाते हैं। वर्ष 2018 में सर्वप्रथम बीएड विद्यार्थियों ने कक्षा एक से 10 तक के विद्यार्थियों को निशुल्क कोचिंग के नाम पर पढ़ाना शुरू किया। सप्ताहभर में ही करीब 80 विद्यार्थी पंजीकृत हुए और फिर शिक्षा सेवा का यह सिलसिला बढ़ता गया। बच्चों को पढ़ाई के अलावा अन्य सकारात्मक पाठ्येतर गतिविधियों में शामिल कर व्यक्तित्व विकास की पाठशाला भी शुरू हुई। इसके बाद निरक्षर महिलाओं को शिक्षित करने का अभियान शुरू हुआ। असर यह कि गांव की तकरीबन सभी महिलाएं साक्षर.शिक्षित हो चुकी हैं।
शिक्षा के साथ ही मिशन मंझरिया में स्वास्थ्य और स्वच्छता को शामिल किया गया। इसके तहत श्री गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय के गांव में हर सप्ताह सचल चिकित्सा सेवा की सुविधा ग्रामीणों को मिली। मिशन के शुरूआत से लेकर अब तक साप्ताहिक स्वास्थ्य शिविरों से 28 हजार से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं। वहीं स्वच्छता जागरूकता के क्रम में बीएड विद्यार्थियों द्वारा लगाई जाने वाली कक्षाओं के बाद प्रत्येक शनिवार को स्वैच्छिक श्रमदान शिविर का आयोजन शुरू हुआ। इसमें गांव के बच्चे, युवा, बुजुर्ग सभी की सहभागिता हुई। इस शिविर का असर यह हुआ कि सफाई मंझरिया गांव की संस्कृति का हिस्सा बन गई है।
इसी क्रम में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राणि विज्ञान के पूर्व अध्यक्ष प्रो. दिनेश सिंह एक घर.एक पेड़ योजनांतर्गत मौलश्री के 101 पौधे लेकर इस मिशन के साझीदार बने। इस पहल से मंझरिया में पौधरोपण कार्यक्रम एक आवश्यक अंग बन गया है।
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