नयी दिल्ली , फरवरी 10 -- युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में संगठन के कार्यकर्ताओं ने एप्स्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम आने और पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब से जुड़े विवाद पर उनकी चुप्पी के खिलाफ मंगलवार को यहां प्रधानमंत्री आवास का घेराव किया।
युवा कांग्रेस के प्रवक्ता वरुण पांडे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि देश भर से आये युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता यहां जंतर मंतर पर एकत्रित हुए। प्रधानमंत्री आवास का घेराव करने जा रहे युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने के लिए पार्टी महासचिव तथा राज्यसभा सदस्य नासिर हुसैन, पार्टी के लोकसभा सदस्य दीपेंद्र सिंह हुड्डा, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव, पार्टी के राष्ट्रीय सचिव प्रदीप नरवाल सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता तथा पदाधिकारी शामिल हुए।
उन्होंने बताया कि युवा संगठन के कार्यकर्ता जंतर मंतर में एकत्रित होकर श्री चिब के नेतृत्व में जब पीएम आवास के घेराव के लिए आगे बढ़ने लगे तो दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे जाने से रोक दिया। युवाओं ने जब श्री चिब के साथ जबरन आगे बढ़ने का प्रयास किया तो करीब 250 कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने बाद में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के आवास के बाहर भी प्रदर्शन किया।
युवा कांग्रेस अध्यक्ष ने इस दौरान प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि एप्स्टीन फाइल्स में नाम आने के डर से श्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आगे पूरी तरह सरेंडर कर दिया है। उनका कहना था कि जिस तरह से श्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने सरेंडर किया है और उनकी शर्तों पर देशहित को नजरअंदाज करते हुए व्यापार समझौते किये हैं उससे साफ हो गया है प्रधानमंत्री बहुत कमजोर हैं और इसीलिए वह सरेंडर करते हैं।
उन्होंने कहा कि श्री मोदी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के सवालों से डरते हैं। जब श्री गांधी ने पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल नरवणे की किताब की सच्चाई का जिक्र लोकसभा में करना चाहा तो उन्हें रोका गया। इससे स्पष्ट होता है कि श्री मोदी को विपक्ष के नेता के सवालों से डर लगता है इसलिए वह संसद से भागे और उन्हें संसद में झूठ का सहारा लेना पड़ा।
युवा कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा "जनरल नरवणे की किताब तथ्यों को लेकर सामने आई तो इससे बड़े सच से पर्दा उठ गया। जब चीन भारत पर दबाव बना रहा था, तब प्रधानमंत्री हमारी सेना के साथ खड़े नहीं हुए। बहस को रोक दिया गया और संसद को ख़ामोश किया गया। देश में पहली बार विपक्ष के नेता को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने नहीं दिया गया। संसद में इसी तरह से नेता विपक्ष को जिस तरह अपनी बात रखने से रोका जा रहा है, यह हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। श्री मोदी लोकसभा में भाषण देने नहीं आए, इसलिए अध्यक्ष से सफाई दिलवा रहे हैं और झूठ को छिपा रहे है। उनका कहना था कि श्री मोदी ने अपनी खोखली छवि बनाने के लिए पूरे देश को दांव पर लगा दिया है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित