, Dec. 31 -- तेहरान, 31 दिसंबर (वार्ता/शिन्हुआ) ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि उनके देश को युद्ध का डर नहीं है, लेकिन उसने अमेरिका के साथ "कभी कोई टकराव नहीं चाहा" और वह "सच्ची और गंभीर" बातचीत के लिए तैयार है।
उन्होंने यह बात एक्स पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद लिखी, कि ईरान को बैलिस्टिक मिसाइल या परमाणु हथियार कार्यक्रम फिर से शुरू करने पर बड़े सैन्य हमले का सामना करना पड़ेगा।
श्री अराघची ने कहा कि ईरान ने अमेरिका के साथ कभी कोई टकराव नहीं चाहा। उन्होंने कहा कि ईरान के सशस्त्र बल किसी भी हमले का निर्णायक उपायों से जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
उन्होंने कहा, "हमारे संयम को कमजोरी नहीं समझना चाहिए। यही एकमात्र कारण है कि हमारे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकाने सुरक्षित रहे। ईरानी आपसी हित के मुद्दों पर एक निष्पक्ष और संतुलित समझौते के उद्देश्य से सच्ची और गंभीर बातचीत से पीछे नहीं हटते हैं।"उन्होंने कहा कि ईरान और उसके लोग परमाणु हथियार नहीं चाहते हैं, लेकिन ईरानी अपने "कानूनी अधिकारों" को कभी नहीं छोड़ेंगे। श्री अराघची ने कहा कि अमेरिका या तो "इज़रायल की गढ़ी गयी कहानियों" पर निर्भर रहना जारी रख सकता है, या फिर "यथार्थवाद, कूटनीति और आपसी सम्मान पर आधारित" रास्ता अपना सकता है।
मंत्रालय ने बुधवार सुबह जारी एक बयान में कहा कि श्री अराघची ने अन्य देशों के विदेश मंत्रियों को एक पत्र लिखकर सोमवार को अमेरिका की ईरान विरोधी धमकियों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का "खुला उल्लंघन" करार दिया।
उन्होंने कहा, "ट्रंप की धमकियां संरा चार्टर का खुला उल्लंघन हैं जिसने राज्यों की क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय संप्रभुता के खिलाफ ऐसी किसी भी धमकी या बल प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है।" उन्होंने अपने विदेशी समकक्षों से श्री ट्रंप की हालिया धमकियों और "भड़काऊ" टिप्पणियों की निंदा करने का आह्वान किया।
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