इस्लामाबाद , अप्रैल 09 -- ईरान का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल युद्धविराम वार्ता के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंच गया है और चेतावनी दी है कि उसकी पूर्व शर्तें पूरी नहीं होने पर वार्ता प्रक्रिया पटरी से उतर सकती है। मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ़ के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल में सुरक्षा, राजनीतिक, सैन्य, आर्थिक और कानूनी समितियों के सदस्य शामिल हैं। यह दल शुक्रवार रात इस्लामाबाद पहुंचा।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल में अन्य अधिकारियों में विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सुप्रीम नेशनल डिफेंस काउंसिल के सचिव अली-अकबर अहमदियन, सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेमती, साथ ही संसद के कई सदस्य शामिल हैं।अमेरिका के पक्ष से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, वाशिंगटन के क्षेत्रीय दूत स्टीव विटकॉफ, और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार और दामाद जैरेड कुशनर भी इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं।
इससे पहले, श्री ट्रंप ने मंगलवार को ईरान के खिलाफ अमेरिकी हमलों में दो सप्ताह का विराम घोषित किया था, जो इस संघर्ष के दौरान अमेरिका के शामिल होने के 40 दिन बाद आया।श्री ग़ालिबाफ़ ने शुक्रवार को कहा था कि लेबनान में युद्धविराम और ईरान की रोकी गई संपत्तियों की रिहाई, अमेरिका के साथ वार्ता शुरू करने से पहले आवश्यक शर्तें हैं।
ईरान द्वारा पेश 10 सूत्री प्रस्ताव को श्री ट्रंप ने वार्ता के लिए "कारगर आधार" बताया है। इसमें सभी मोर्चों पर आक्रामक कार्रवाई रोकने की शर्त शामिल है, जिसमें लेबनान भी शामिल है। श्री ट्रंप की घोषणा के बाद हालांकि इज़रायल ने लेबनान पर हमले तेज किये हैं, जिनमें महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों की मौत हुई है।
श्री ग़ालिबाफ़ ने इस्लामाबाद पहुंचने पर कहा कि ईरान का अमेरिका के साथ पिछले अनुभव विश्वासपूर्ण नहीं रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि "एक वर्ष से भी कम समय में दो बार, वार्ता के दौरान और ईरान की सद्भावना के बावजूद, अमेरिका ने हम पर हमला किया और कई युद्ध अपराध किए।"उन्होंने कहा, "हमारे पास सद्भावना है, लेकिन हमें दूसरे पक्ष पर भरोसा नहीं है।"श्री ग़ालिबाफ़ ने कहा कि यदि अमेरिका वास्तविक समझौते के लिए तैयार होगा और ईरानी जनता के अधिकारों को मान्यता देगा, तभी ईरान समझौते के लिए तत्परता दिखाएगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित