दोहा , नवंबर 03 -- संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि दुनिया में का भूख का संकट संसाधनों की कमी से नहीं आता , बल्कि यह असमानता, संघर्ष और नीतिगत फैसलों का परिणाम होता है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष एनालेना बैरबॉक ने यहां सोमवार को राष्ट्राध्यक्षों, मंत्रियों और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों को संबोधित करते हुए यह बात कही।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 67 करोड़ से अधिक लोगों ने भूख का अनुभव किया, जबकि 2.3 अरब लोग मध्यम या गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ है अरबों लोग यह सोचने पर मजबूर हैं कि उनका अगला भोजन कहाँ से आएगा, और माता-पिता अपने बच्चों को भूखे सोते हुए देख रहे हैं। यह उस दुनिया में हो रहा है जो हर दिन एक अरब से अधिक भोजन बर्बाद करती है।
सुश्री बैरबॉक ने कहा कि भूख का संकट भोजन की कमी का नहीं है बल्कि यह पूरी तरह से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि असफलता पहुँच, वहनीयता और सामाजिक सुरक्षा में है।
उन्होंने जलवायु परिवर्तन को भूख का तेज़ी से बढ़ता कारण बताया। साहेल क्षेत्र की अपनी हाल की यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ की उपजाऊ ज़मीन अब धूल में बदल गई है क्योंकि तापमान बढ़ रहा है और बारिश कम हो रही है। उन्होंने कहा कि यह खाद्य असुरक्षा की नई अग्रिम पंक्ति है। अगर वैश्विक तापमान वृद्धि को नहीं रोका गया, तो 1.8 अरब और लोग खाद्य असुरक्षा का सामना कर सकते हैं, लेकिन अगर इसे 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखा जाए और तापमान से अनुकूलन व लचीलापन में निवेश किया जाए तो लाखों लोगों को गरीबी में धंसने से बचाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि ब्राज़ील की जी20 अध्यक्षता के दौरान 2024 में शुरू किया गया "ग्लोबल अलायंस अगेंस्ट हंगर एंड पॉवर्टी" अब लगभग 200 सदस्यों तक पहुँच चुका है। इनमें 100 से अधिक देश, क्षेत्रीय संगठन, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियाँ और नागरिक समाज समूह शामिल हैं।
दोहा में हुई बैठक इस गठबंधन का नेताओं के स्तर पर यह पहला सत्र था, जिसका उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा का विस्तार करना और जलवायु-प्रतिरोधी कृषि को मज़बूत बनाना है।
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