नयी दिल्ली , जनवरी 15 -- राष्ट्रीय राजधानी के यशोभूमि में 19 और 20 फरवरी को बिल्ड कनेक्ट 2026 का आयोजन होगा, जिसमें 300 से अधिक वितरक और 3,000 से ज़्यादा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम स्तर के डीलरों के भाग लेने की उम्मीद है।

बिल्ड कनेक्ट 2026 के प्रतिनिधियों ने यह जानकारी यहां गुरूवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दी। इस दौरान अंबा शक्ति समूह के अध्यक्ष कमल गोयल ने कहा कि जैसे-जैसे स्टील क्षमता बढ़ रही है और निर्माता अधिक वैल्यू ऐडेड उत्पाद पेश कर रहे हैं, वैसे-वैसे एक सक्षम और भविष्य के लिए तैयार वितरण नेटवर्क विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी बाज़ार अपनाने के लिए केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।

वहीं, बिल्ड कनेक्ट 2026 के आयोजक एवं उद्योग प्रतिनिधि सुमित अग्रवाल ने कहा कि भारत का बढ़ता उत्पादन आधार उद्योग के लिए यह अवसर प्रस्तुत करता है कि वह क्षमता विस्तार के साथ-साथ अपने वितरण ढाँचे को भी आधुनिक और सशक्त बनाए।

अखिल भारतीय लोहा व्यापार संघ के अध्यक्ष अमित गुप्ता ने कहा कि ऐसा राष्ट्रीय मंच सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम स्तर के डीलर और डिस्ट्रिब्यूटरों को व्यापक पहचान दिलाने, विभिन्न क्षेत्रों के साथियों से सीखने और उद्योग के अगले विकास चरण के लिए खुद को तैयार करने में मदद कर सकता है।

प्रतिनिधियों ने संवाददाता सम्मेलन के दौरान बताया कि उद्योग आकलन के अनुसार, डीलर और वितरक चैनल के माध्यम से हर वर्ष लगभग 3.5 लाख करोड़ रुपये मूल्य की स्टील और निर्माण सामग्री की बिक्री होती है। यह आँकड़ा संगठित वित्त तक बेहतर पहुँच, तरलता चक्रों में सुधार और स्मार्ट इन्वेंट्री प्रबंधन की आवश्यकता को रेखांकित करता है, ताकि जोखिम प्रबंधन के साथ-साथ विकास को भी समर्थन दिया जा सके।

उन्होंने बताया कि इस आयोजन में 300 से अधिक वितरक और 3,000 से ज़्यादा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम स्तर के डीलरों की भागीदारी अपेक्षित है, जो भारत के ट्रेड आधारित वितरण नेटवर्क के व्यापक स्वरूप को दर्शाती है।

उन्होंने बताया कि भारत में स्टील और निर्माण सामग्री क्षेत्र तेज़ी से विस्तार के चरण में प्रवेश कर रहा है और उत्पादन क्षमता में निरंतर वृद्धि तथा घरेलू मांग के स्थिर बने रहने से इस क्षेत्र को मजबूती मिल रही है जिसके कारण स्टील की स्थापित क्षमता वर्ष 2030 तक 3000 लाख टन हो सकती है।

उद्योग आकलन के अनुसार वर्ष 2025 में भारत का स्टील उत्पादन 1600 लाख टन को पार कर गया और 2030 तक इसकी स्थापित क्षमता के 3000 लाख टन के स्तर तक पहुँचने के आसार हैं।

इसी तरह, बुनियादी ढाँचे और आवास क्षेत्र में लगातार बनी गति के चलते सीमेंट क्षमता में भी समानांतर विस्तार देखा जा रहा है। जैसे-जैसे क्षमता विस्तार तेज़ हो रहा है, उद्योग का ध्यान अब केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित न रह कर इस बढ़े हुए पैमाने को बाज़ार तक कितनी कुशलता से पहुंचान पर केंद्रित हो रहा है।

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