प्रयागराज , जनवरी 01 -- उत्तर प्रदेश के माघ मेले और कुंभ मेले में आकर्षण का केंद्र रहने वाले रुद्राक्ष वाले बाबा के नाम से विख्यात शिव योगी अभय चैतन्य ब्रह्मचारी मौनी महाराज ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण के खिलाफ धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। मौनी महाराज संगम लोअर मार्ग पर जूना अखाड़े के एक संत के शिविर में धरने पर बैठे हैं। मौनी महाराज ने मेला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि हर साल वह माघ मेले में राम जन्मभूमि मुक्ति और भव्य मंदिर निर्माण को लेकर अनुष्ठान करते थे। हालांकि राम मंदिर निर्माण के बाद अब वह मथुरा और काशी के लिए संकल्पित अनुष्ठान कर रहे हैं लेकिन मेला प्रशासन ने 16 नवंबर 2025 को जमीन व सुविधाओं के लिए आवेदन देने के बाद भी उन्हें सही स्थान पर समुचित जमीन नहीं उपलब्ध कराई है। जब वह 31 दिसंबर को मेले में पहुंचे और मेलाधिकारी से मिलने की कोशिश की तो मेला अधिकारी के कार्यालय पर बैरिकेडिंग लगाकर पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है जिसके चलते उन्हें मेलाधिकारी से मिलने तक नहीं दिया गया। मजबूरी में वह धरना प्रदर्शन को विवश हैं।

शिव योगी मौनी महाराज ने कहा कि वह वर्ष 1984 से लगातार माघ मेले और कुंभ मेले में अनुष्ठान करते चले आ रहे हैं। वह कड़ाके की ठंड में शिविर से संगम तक चक्रवर्ती दंडवत परिक्रमा यानि लोट कर करते हैं। मेला प्रशासन ने यह सब कुछ जानते हुए भी उन्हें मेले में काफी दूर जमीन आवंटित की है, जो कि शिविर बनाने योग्य तक नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया है कि पिछले कई वर्षों में लगातार उनकी संस्था को अलग-अलग जगह पर मेला प्रशासन ने विस्थापित भी किया है। मौनी महाराज का कहना है कि वह इस बार माघ मेले में 5 करोड़ 51 लाख रुद्राक्ष के शिवलिंग का निर्माण करना चाहते हैं। किसके साथ ही 12 करोड़ 51 लाख महामंत्रों के जप की पूर्णाहुति के बाद 101 कुंतल की महा आहुति आतंकवाद विनाश के लिये करना चाहते थे लेकिन मेला प्रशासन की उदासीनता के चलते यह सब कुछ संभव नहीं हो पा रहा है।

मौनी महाराज ने कहा है कि पौष पूर्णिमा तीन जनवरी से उनके महा यज्ञ का शुभारंभ होना था। 1644 वीं चक्रवर्ती दंडवत परिक्रमा काशी मथुरा मंदिर निर्माण के लिए होनी थी। लेकिन यह सब कुछ अनुष्ठान ना होने के लिए सीधे तौर पर प्रयागराज मेला प्राधिकरण के अफसर जिम्मेदार हैं। मौनी महाराज ने कहा कि वह 3 जनवरी तक इंतजार करेंगे नहीं तो मेले को छोड़कर वह दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर संत समाज के साथ आमरण अनशन शुरू करेंगे।

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