जयपुर , अप्रैल 15 -- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा परिसीमन को लेकर जताये रोष एवं आशंकाओं के मद्देनजर दक्षिण की चिंताओं को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए।

श्री गहलोत ने बुधवार को जयपुर हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत में परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों में उत्पन्न रोष को लेकर पूछे प्रश्न के जवाब में यह बात कही। उन्होंने कहा "तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने जो गुस्सा एवं रोष प्रकट किया है, आशंकाएं जताई हैं उसमें मेरा मानना है कि मोदी जी को दक्षिण की चिंताओं को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए।"उन्होंने कहा, " साउथ के लोगों को अगर यह महसूस हो गया कि नॉर्थ वाले हमारे ऊपर अनावश्यक थोप रहे हैं और हमारी स्थिति कमजोर कर रहे हैं तो स्थिति बिगड़ सकती है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन स्टालिन ने कह ही दिया है जो बहुत खतरनाक संकेत है। वर्ष 1950-60 के वक्त में दक्षिण में जो आंदोलन हुए थे वो स्थिति वापस नहीं बन जाए। श्री स्टालिन ने इतनी खतरनाक बात का संकेत दिया है। उससे अंदाजा लगा लीजिए कि उनके दिलों में आग लगी हुई है। तो यह बहुत संवेदनशील मामला है।"श्री गहलोत ने कहा कि पक्ष विपक्ष सब चाहते हैं महिलाओं को आरक्षण मिले, लेकिन ये जो तरीका परिसीमन का अपना रहे हैं और जो जनगणना नहीं कर पाए क्यों नहीं कर पाए पहले। वर्ष 2021 में हो जाना चाहिए था। कोई न कोई बहाना करते गए। अब जो है जनगणना करने के जो कमिश्नर हैं, वो कह रहे हैं एक साल के अंदर 27 में सेंसस कर सकते हैं। फिर भी उससे अंदाजा लगा लीजिए तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव चल रहे हैं, उसके बीच में संसद का सत्र क्यों बुला लिया गया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे ने कहा था कि चुनाव समाप्त हो जाता है तब बुलाओ क्योंकि सब लोग चुनाव में व्यस्त होंगे। तब भी जल्दबाजी कर रहे हो। इसका मतलब आपके दिल में कई तरह की खोट है। महिला आरक्षण के नाम पर कोई षड्यंत्र है। उन्होंने कहा कि अगर यह पारित नहीं हुआ तो दोष देंगे विपक्षी पार्टियों को तो यह जो चाल चल रहे हैं, यह लोकतंत्र में उचित नहीं कहा जा सकता।

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