चेन्नई , जनवरी 21 -- 'विश्वासघात' का आरोप लगाते हुए महज पांच महीने पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से नाता तोड़ने वाले अम्मा मक्कल मुन्नेत्र कड़गम (एएमएमके) के संस्थापक टीटीवी दिनाकरन ने बुधवार को एक बार फिर अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के नेतृत्व वाले राजग में वापसी कर ली। यह राजनीतिक घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तमिलनाडु दौरे और आगामी विधानसभा चुनाव के लिये राजग के चुनावी अभियान की शुरुआत से ठीक दो दिन पहले सामने आया है।
श्री दिनाकरन ने राजग में वापसी से पहले केंद्रीय मंत्री और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिये भाजपा के प्रभारी पीयूष गोयल से मुलाकात की। उन्होंने कहा, " हम अतीत के मुद्दों को पार्टी के हितों और तमिलनाडु के व्यापक कल्याण पर हावी नहीं होने दे सकते।" शहर के एक सितारा होटल में हुई बैठक के बाद दिनाकरन को औपचारिक रूप से एनडीए में फिर से शामिल किया गया। इस मौके पर तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधानमंडल दल के नेता नैनार नागेन्द्रन सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
एएमएमके की राजग में वापसी का अन्नाद्रमुक ने स्वागत किया है, जो राज्य में आगामी चुनावों के लिये गठबंधन का नेतृत्व कर रही है। श्री दिनाकरन ने मीडिया से कहा, " अम्मा (जयललिता) के स्वर्णिम शासन की वापसी के लिए समझौते करना हमारी कमजोरी नहीं है। आज अम्मा के सभी कार्यकर्ता एकजुट हो रहे हैं।"यह कदम श्री दिनाकरन के पूर्व रुख से एक बड़ा राजनीतिक पलटाव माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने पहले अन्नाद्रमुक के मुख्यमंत्री पद के चेहरे और नेता प्रतिपक्ष एडप्पादी के. पलानीस्वामी को स्वीकार करने से इनकार करते हुए राजग में वापस न लौटने की घोषणा की थी। दिलचस्प बात यह है कि वही मुख्यमंत्री पद का मुद्दा अब वापसी के समय बाधा नहीं बना।
श्री दिनाकरन की वापसी के बाद पलानीस्वामी ने अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेताओं के साथ आपात बैठक बुलाई है। पार्टी की महासभा पहले ही उन्हें यह अधिकार दे चुकी है कि वह गठबंधन में शामिल दलों पर अंतिम निर्णय लें। श्री दिनाकरन ने अपने पहले के विरोध को 'सहयोगी दलों के बीच भाई-भाई का मतभेद' बताते हुए कहा, " जो समझौता करते हैं, वे हारते नहीं हैं। यह फैसला अम्मा के शासन की वापसी और सत्ता परिवर्तन के बड़े लक्ष्य को ध्यान में रखकर लिया गया है।"राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि राजग से बाहर गये पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम भी अपना रुख बदल सकते हैं। हाल ही में श्री दिनाकरन ने कहा था, " चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि कौन मित्र है और कौन शत्रु।"एएमएमके की वापसी से एनडीए को विशेष रूप से दक्षिणी जिलों और कावेरी डेल्टा क्षेत्र में मजबूती मिलने की उम्मीद है। पिछले विधानसभा चुनावों में एएमएमके की मौजूदगी से इन क्षेत्रों की कम से कम 22 सीटों पर एआईएडीएमके को नुकसान हुआ था। इस बीच, श्री पलानीस्वामी ने एक बयान में श्री दिनाकरन का स्वागत करते हुए द्रमुक की 'वंशवादी राजनीति' के खिलाफ एकजुट लड़ाई का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समान विचारधारा वाली ताकतों का एक साथ आना 'तानाशाही और जनविरोधी' द्रमुक शासन को हटाने के लिये जरूरी है।
श्री पलानीस्वामी ने कहा, "आज तमिलनाडु को वंशवादी कुशासन से मुक्त कराने की दिशा में एक और निर्णायक कदम उठाया गया है। अम्मा के आशीर्वाद से हम सभी लोकतांत्रिक ताकतों को एकजुट करेंगे और जनहित में शासन की बहाली करेंगे।"अन्नाद्रमुक, भाजपा, एएमएमके और अंबुमणि रामदास गुट की पीएमके के अलावा तमिलनाडु में राजग के अन्य घटक दलों में पूर्व केंद्रीय मंत्री जी.के. वासन की तमिल माणिला कांग्रेस, न्यू जस्टिस पार्टी और इंडिया जननायक काच्चि शामिल हैं। श्री मोदी की चेन्नई के पास प्रस्तावित रैली से पहले श्री गोयल का यह दौरा गठबंधन के घटक दलों को अंतिम रूप देने, सीट बंटवारे पर सहमति बनाने और रैली में उनकी मौजूदगी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अहम माना जा रहा है।
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