नई दिल्ली , दिसंबर 10 -- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन देशों ओमान, जार्डन और इथियोपिया की चार दिन की प्रस्तावित यात्रा से इन देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारियों को मजबूती मिलने की संभावना है।

श्री मोदी के 15 से 16 दिसम्बर तक जार्डन , 16 से 17 दिसम्बर तक इथियोपिया और 17 तथा 18 दिसम्बर को ओमान यात्रा पर रहने की संभावना है।

इस यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत करना, आर्थिक साझेदारी को प्रगाढ बनाना और प्रमुख क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग का विस्तार करना है।

ओमान ने 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान खुले रूप से भारत का समर्थन किया था, और यह ऐतिहासिक सद्भाव आज भी दोनों देशों के संबंधों की नींव है।

श्री मोदी की यात्रा का मुख्य उद्देश्य काफी समय से लंबित भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते को अंतिम रूप देना और उस पर हस्ताक्षर करना है।

इस समझौते में ओमान की स्थानीय नीतियों और भारत की तीसरे देशों के माध्यम से सामान के आवागमन की चिंताओं जैसे लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को सुलझाने का प्रयास किया जायेगा। समझौते पर अमल के बाद मौजूदा लगभग 12 अरब डॉलर के वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है जो भारत के कच्चे तेल के आयात और उसके पेट्रोलियम उत्पादों, खाद्य पदार्थों और विनिर्मित वस्तुओं के निर्यात से संचालित होता है। यह समझौता ओमान में रहने और काम करने वाले पौने सात लाख से अधिक भारतीय प्रवासियों को समर्थन देने वाले आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूत करेगा, जो खाड़ी क्षेत्र में सबसे स्थिर भारतीय समुदायों में से एक है।

यात्रा के दौरान दोनों पक्षों को ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा किये जाने की उम्मीद है। इसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास, भारत की रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दुक़्म बंदरगाह तक पहुंच और व्यापक समुद्री सहयोग शामिल है, जो खाड़ी क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक माहौल के बीच महत्वपूर्ण हो गया है।

यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने के साथ-साथ भारत की व्यापक पश्चिम एशिया पहुंच का हिस्सा है। यह यात्रा भारत-ओमान संबंधों के अगले चरण में एक संभावित महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

इथियोपिया के साथ भारत के संबंध लगभग 2,000 वर्ष पुराने माने जाते हैं जिनमें छठी सदी में अदुलिस बंदरगाह के माध्यम से मसाले, सोना और हाथीदांत के प्राचीन व्यापार के रिकॉर्ड मिलते हैं।

अदीस अबाबा में प्रधानमंत्री मोदी के प्रधानमंत्री अबी अहमद के साथ व्यापक वार्ता की उम्मीद है, जिन्होंने इरिट्रिया के साथ इथियोपिया के लंबे समय से चले आ रहे सीमा संघर्ष को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात 2023 में जोहान्सबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी जहां व्यापार, निवेश, रक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि, युवा कौशल विकास और लोगों के बीच संपर्क सहित कई विषयों पर हुई थीं।

जॉर्डन की श्री मोदी की संभावित यात्रा से उन रणनीतिक और बहुआयामी संबंधों के और मजबूत होने की उम्मीद है जो फरवरी 2018 में उनकी ओमान की ट्रांज़िट यात्रा के बाद लगातार विकसित हुए हैं।

दोनों देशों ने रक्षा सहयोग, आतंकवाद-रोधी साझेदारी, व्यापार, निवेश, ऊर्जा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को शामिल करने वाली एक मजबूत साझेदारी विकसित की है। भारत, जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है और फॉस्फेट तथा कपड़ा जैसे क्षेत्रों में एक प्रमुख निवेशक है।

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