अहमदाबाद , जनवरी 02 -- गुजरात में अहमदाबाद के मैरिंगो सिम्स हॉस्पिटल में ट्रांसकैथेटर ट्राइकसपिड वाल्व रिप्लेसमेंट (टीटीवीआर) से दर्दी को नवजीवन मिला है।
ऑपरेटिंग कार्डियोलॉजिस्ट एवं गुजरात के वरिष्ठ हार्ट स्पेशियालिस्ट डॉ. मिलन छाग ने शुक्रवार को यहां कहा कि मेडिकल सायन्स और ह्युमानिटी के अद्भुत संगम की मिसाल पेश करते हुए, मैरिंगो सिम्स (सीआईएमएस) हॉस्पिटल ने गुजरात में पहली बार ट्रांसकैथेटर ट्राइकस्पिड वाल्व रिप्लेसमेंट (टीटीवीआर) प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा इतिहास रच दिया है। यह एडवान्स्ड और लाईफसेविंग प्रोसेस 61 वर्षीय महिला मरीज पर की गई, जिनके जीवन में पहले ही तीन बड़ी हार्ट सर्जरी हो चुकी थीं और जिनके लिए ट्रेडिशनल ओपन-हार्ट सर्जरी अब संभव नहीं रह गई थी।
मरीज का इलाज अत्यंत चुनौतीपूर्ण और प्रेरणादायक रहा है। वर्ष 1984 में उनकी पहली हार्ट वाल्व सर्जरी हुई, इसके बाद 1996 में एक जटिल री-डू सर्जरी की गई और फिर 2016 में ट्राइकसपिड वाल्व रिप्लेसमेंट किया गया। समय के साथ बदला हुआ वाल्व कमजोर हो गया और उसमें गंभीर लीकेज शुरू हो गया। ट्राइकसपिड वाल्व हृदय के दाहिने हिस्से का एक अत्यंत महत्वपूर्ण वाल्व होता है, जिसके माध्यम से रक्त हृदय में प्रवेश करता है, और इसे उपचार की दृष्टि से सबसे जटिल वाल्वों में गिना जाता है।
वाल्व फेल होने के कारण मरीज को पैरों और चेहरे में सूजन, लीवर में कंजेशन, सांस फूलना और अत्यधिक थकावट जैसी गंभीर समस्याएँ होने लगीं, जिससे रोजमर्रा की साधारण गतिविधियाँ भी कठिन हो गई थीं। चिकित्सकों ने परिवार को स्पष्ट रूप से बताया कि एक और ओपन-हार्ट सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण और जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में, जब कोई सुरक्षित सर्जिकल विकल्प शेष नहीं था, तब अस्पताल की मल्टीडिसिप्लिनरी हार्ट टीम ने एक एडवान्स्ड और न्यूनतम इनवेसिव उपचार पद्धति, ट्रांसकैथेटर ट्राइकसपिड वाल्व रिप्लेसमेंट (टीटीवीआर) को अपनाने का निर्णय लिया।
इस प्रक्रिया में छाती खोले बिना क्षतिग्रस्त वाल्व को बदला जाता है, जिससे मरीज को नई आशा मिली। यह अत्यंत उच्च जोखिम वाली टीटीवीआर प्रक्रिया 26 दिसंबर 2025 को सफलतापूर्वक की गई। प्रक्रिया के बाद मरीज की स्थिति स्थिर रही, स्वास्थ्य में निरंतर सुधार हुआ और मात्र तीन दिनों के भीतर उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया, जिससे परिवार को अपार राहत और उम्मीद मिली।
उन्होंने कहा, मैं पिछले 31 वर्षों से इस मरीज का इलाज कर रहा हूँ। उनके अनुशासन, विश्वास और नियमित फॉलो-अप के कारण वे तीन ओपन-हार्ट सर्जरी के बावजूद लंबे समय तक स्वस्थ रहीं। जब ट्राइकसपिड वाल्व फेल होने के कारण उनकी जीवन गुणवत्ता अत्यंत खराब हो गई और बार-बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, तब यह टीटीवीआर प्रक्रिया उनके लिए जीवनदायिनी साबित हुई। स्थानीय एनेस्थीसिया और कांशस सेडेशन में की गई इस अनूठी प्रक्रिया ने उन्हें एक बार फिर सक्रिय जीवन जीने का अवसर दिया।
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