मुरादाबाद , मार्च 28 -- उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में वर्ष 2011 के चर्चित मैनाठेर बवाल मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए डीआईजी पर हुए जानलेवा हमले के मामले में 16 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

एडीजे द्वितीय कृष्ण कुमार की अदालत ने शनिवार को यह निर्णय सुनाया। शासकीय अधिवक्ता बृजराज सिंह के अनुसार, 23 मार्च को सभी 16 आरोपितों को दोषी करार दिया गया था, जबकि सजा सुनाने की तिथि 27 मार्च निर्धारित थी, लेकिन अवकाश के कारण शनिवार को सजा सुनाई गई।

यह घटना 6 जुलाई 2011 को मैनाठेर थाना क्षेत्र के असालतनगर बघा गांव में हुई थी। एक युवती से छेड़खानी के आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पहुंची पुलिस टीम का ग्रामीणों ने विरोध किया। महिलाओं द्वारा कुरान के अपमान का आरोप लगाए जाने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और देखते ही देखते भीड़ ने उग्र रूप धारण कर लिया।

उग्र भीड़ ने तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह (वर्तमान में एडीजीपी) को घेर लिया। उनकी पिस्टल छीन ली गई और उन्हें बेरहमी से पीटा गया। जान बचाने के लिए डीआईजी पास के पेट्रोल पंप के कमरे में छिपे, लेकिन भीड़ ने दरवाजा तोड़कर उन्हें बाहर निकाल लिया और हमला जारी रखा।

इस घटना में डीआईजी सहित 10 पुलिसकर्मी और कुल 18 लोग घायल हुए थे। उपद्रवियों ने पुलिस वाहनों और चौकी में तोड़फोड़ कर आगजनी भी की थी।

पुलिस ने इस मामले में 33 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था, जिनमें से 25 को गिरफ्तार किया गया। तीन आरोपितों की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है, जबकि छह नाबालिगों के मामले अलग चल रहे हैं।

लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने 16 आरोपितों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सजा सुनाए जाने के बाद अदालत परिसर में भावुक माहौल देखने को मिला। फैसले के बाद पुलिस ने सभी दोषियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जेल भेज दिया है।

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