पटना , फरवरी 10 -- बिहार के उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मंगलवार को कहा कि राज्य में आयोजित होने वाले राजकीय समेत अन्य सभी महत्वपूर्ण मेलों का हमारी सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन में विशेष महत्व है।

श्री सिन्हा ने आज कहा कि मेलों के आयोजन में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और सुव्यवस्थित प्रबंधन सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का उद्देश्य यही है कि मेला आयोजन समयबद्ध योजना, स्वीकृत बजट एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप हो। सभी जिलाधिकारी समय से प्रस्ताव भेजें, स्वीकृत राशि की सीमा में ही व्यय करें और बिना पूर्व अनुमति किसी प्रकार की देनदारी उत्पन्न न करें। इससे अनावश्यक विवादों और वित्तीय दायित्वों से बचाव होगा तथा मेला आयोजन सुचारू, जिम्मेदार और जनहितकारी ढंग से संपन्न हो सकेगा।

राज्य के विभिन्न जिलों में आयोजित होने वाले राजकीय घोषित, बिहार राज्य मेला प्राधिकार के प्रबंधन में शामिल तथा अन्य महत्वपूर्ण मेलों के आयोजन को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जिलों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मेला आयोजन के लिये राशि की अधियाचना एवं व्यय पूर्व निर्धारित नियमों के अनुरूप ही किया जाएगा और किसी भी परिस्थिति में विभागीय स्वीकृति के बिना अतिरिक्त व्यय कर देनदारियों का सृजन स्वीकार्य नहीं होगा।

सचिव श्री जय सिंह द्वारा जारी पत्र में विभागीय पत्रांक-2894 (9), 07.08.2025 का हवाला देते हुए कहा गया है कि मेला आयोजन की अवधि प्रारंभ होने से कम-से-कम दो माह पूर्व संबंधित जिला समाहर्ता को संभावित मदवार व्यय विवरणी के साथ विभाग को राशि आवंटन के लिये प्रस्ताव भेजना अनिवार्य है। साथ ही, विभाग द्वारा स्वीकृत राशि के अनुसार ही मेला आयोजन में व्यय किया जाएगा।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रायः देखा गया है कि जिलों द्वारा राशि की अधियाचना अत्यंत विलंब से की जाती है तथा कई बार विभाग की पूर्व स्वीकृति के बिना ही खर्च कर दिया जाता है। इसके परिणामस्वरूप संवेदकों द्वारा न्यायालय में वाद दायर किए जाने की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और विभाग के समक्ष अनावश्यक वित्तीय दायित्व खड़े हो जाते हैं। कुछ मामलों में जिलों द्वारा अत्यधिक राशि की अधियाचना भी की जाती है, जिसे विभाग ने अनुचित परंपरा बताया है।

विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि विभाग स्तर से कम राशि स्वीकृत की जाती है, तो उसी राशि की सीमा के भीतर मेला आयोजन कराया जाए। स्वीकृत राशि से अधिक व्यय की स्थिति में अतिरिक्त राशि का आवंटन विभाग द्वारा नहीं किया जाएगा और उसके लिए संबंधित जिला स्वयं जिम्मेदार होगा।

इस संबंध में विभाग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों एवं अपर समहर्ताओं को भी पत्र की प्रति भेजते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

विभाग ने उम्मीद जताई है कि सभी जिलों के जिला प्रशासन अपने यहां मेला आयोजन में वित्तीय अनुशासन का पालन करते हुए विभागीय निर्देशों के अनुरूप कार्य करेंगे।

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