अमरावती , अप्रैल 27 -- महाराष्ट्र में कुपोषण से निपटने के लिए राज्य सरकार की कई योजनाओं के बावजूद अमरावती जिले के आदिवासी इलाके मेलघाट में अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच कुपोषण से संबंधित 92 बच्चों और पांच माताओं की मौतें दर्ज की गई हैं। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।

चिखलदरा और धारणी की दूरदराज और पहाड़ी तहसीलों में स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे में गंभीर कमियों के कारण निवासियों को इलाज के लिए मेडिकल सुविधाएं मिलने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। बारिश के दिनों में हालात तब और खराब हो जाते हैं, जब कई गांव और बस्तियां बाकी इलाकों से कट जाती हैं। इससे न तो स्वास्थ्यकर्मी वहां पहुंच पाते हैं और न ही मरीज इलाज के लिए बाहर जा पाते हैं।

इस इलाके में लंबे समय से शिशु और बच्चों की मृत्यु दर बहुत अधिक रही है और हाल के आंकड़ों ने एक बार फिर चिंताएं बढ़ा दी हैं। अधिकारी यह दावा करते हैं कि पिछले कुछ सालों में मृत्यु दर में कमी आई है लेकिन मौतों की बार-बार आने वाली खबरों के कारण प्रशासन पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी पहले कई बार इस इलाके में जरूरी सेवाओं की ठीक से आपूर्ति न करने के लिए प्रशासन को फटकार लगाई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आदिवासी समुदायों में प्रचलित पारंपरिक रीति-रिवाज और अंधविश्वास जैसे कारक भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। वे इस बात पर हालांकि जोर देते हैं कि स्वास्थ्य विभाग की यह जिम्मेदारी है कि वह लोगों तक अपनी पहुंच बढ़ाए, जागरूकता फैलाए और समय पर मेडिकल सुविधाएं सुनिश्चित करे।

इस बीच राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। इनमें मौजूदा 100 बिस्तरों वाले उप-जिला अस्पताल को 300 बिस्तरों वाले सामान्य अस्पताल में बदलना और साथ ही चुरनी और चिखलदरा में 50-50 बिस्तरों वाले उप-जिला अस्पताल बनाना शामिल है। जमीन के आवंटन से जुड़े मामले अटके होने के कारण ये परियोजनाएं अभी तक शुरू नहीं हो पाई हैं।

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