मेरठ , जनवरी 07 -- भारतीय थलसेना ने स्वदेशी तकनीक के सहारे अपने प्रमुख हथियार सिस्टम को और मजबूत करने की दिशा में अहम पहल की है। पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लांचर सिस्टम को लंबे समय तक प्रभावी बनाए रखने के लिए अब उसका आधुनिकीकरण और मरम्मत देश में ही की जाएगी।
इस उद्देश्य से सेना की इलेक्ट्रॉनिक्स एवं मैकेनिकल इंजीनियर्स (ईएमई) शाखा ने लार्सन एंड टूब्रो (एल एंड टी) और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कि/s हैं। समझौते के तहत मेरठ छावनी स्थित 510 आर्मी बेस वर्कशॉप में पिनाका सिस्टम के पुराने मॉडलों का ओवरहाल और तकनीकी अपग्रेड किया जाएगा।
सेना के मध्य कमान ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए बताया है कि यह कार्य पूरी तरह भारतीय तकनीकी क्षमता और संसाधनों के माध्यम से किया जाएगा। इससे हथियार प्रणाली को जल्द ऑपरेशन के लिए तैयार रखना आसान होगा और पुरानी तकनीक से जुड़ी दिक्कतों को दूर किया जा सकेगा।
उन्नयन कार्यक्रम की जिम्मेदारी कोर ऑफ ईएमई के अनुभवी सैन्य तकनीकी कर्मियों को सौंपी गई है। उन्हें एलएंडटी और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का तकनीकी सहयोग मिलेगा। सेना और स्वदेशी उद्योग के बीच यह साझेदारी भविष्य में अन्य आर्मी बेस वर्कशॉप्स में भी पुराने रॉकेट सिस्टम के आधुनिकीकरण के लिए एक उपयोगी मॉडल बन सकती है।
रक्षा सूत्रों के अनुसार इस पहल से विदेशी आयात पर निर्भरता घटेगी और रखरखाव की लागत में भी कमी आएगी। साथ ही, देश में ही उन्नत रक्षा तकनीक विकसित करने की क्षमता को बढ़ावा मिलेगा, जिससे सेना की युद्धक तैयारी और लॉजिस्टिक सपोर्ट मजबूत होगा।
माना जा रहा है कि पिनाका वेपन सिस्टम के उन्नयन से जुड़ा यह समझौता आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की सोच को जमीन पर उतारने का प्रयास है, जो आने वाले समय में भारतीय थलसेना की ताकत और भरोसेमंद मारक क्षमता को और बढ़ाएगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित