मेरठ , जनवरी 09 -- मेरठ देहात के सरधना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में दलित महिला की नृशंस हत्या और उसकी नाबालिग बेटी के अपहरण की घटना के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
कानून-व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने गांव को पूरी तरह सील कर दिया है और सभी प्रवेश-निकास मार्गों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। जबकि पीड़ित परिजन आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और अपहृत नाबालिग की सकुशल बरामदगी तक मृतका का अंतिम संस्कार न करने पर अड़े हुए थे।
इस घटना के बाद दलित राजनीति से जुड़े दलों की सक्रियता भी बढ़ गई है और इसे लेकर राजनीतिक स्तर पर पहलें तेज हो गई हैं। एक ओर आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर ने शुक्रवार को पीड़ित परिवार से वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क कर न्याय का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में दलितों पर हो रहे अत्याचारों पर अब चुप्पी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कपसाड़ को हाथरस जैसी शर्मनाक घटना नहीं बनने दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए पार्टी हर स्तर पर संघर्ष करेगी।
वहीं बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भी इस प्रकरण पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट कर घटना को अत्यंत दुखद, शर्मनाक और चिंताजनक बताया तथा प्रदेश सरकार से मांग की कि महिलाओं की इज्जत-आबरू से खिलवाड़ और हत्या जैसी घटनाओं को पूरी गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आपराधिक तत्वों को ऐसे घृणित कृत्यों से रोका जा सके।
दूसरी तरफ पुलिस के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कपसाड़ गांव में इस घटना के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। कानून-व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने गांव को पूरी तरह सील कर दिया है और सभी प्रवेश-निकास मार्गों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
घटना के बाद गांव में किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। पीएसी और स्थानीय पुलिस की बड़ी टुकड़ियां तैनात हैं। कई राजनीतिक दलों के नेता गांव पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें रोका जा रहा है।
इसी क्रम में सरधना से समाजवादी पार्टी विधायक अतुल प्रधान को भी गांव के बाहर पुलिस ने रोक लिया। इससे उनके समर्थकों में नाराजगी फैल गई और मौके पर धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। विरोध में विधायक मौके पर ही धरने पर बैठ गए और प्रशासन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया।
बाद में पीड़ित परिवार स्वयं गांव के बाहर आकर विधायक के पास बैठ गया। स्थिति को संभालते हुए क्षेत्राधिकारी ने पीड़ित परिवार से बातचीत की और उन्हें पुलिस वाहन से गांव वापस भेजा। पीड़ित परिजन आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और अपहृत नाबालिग की सकुशल बरामदगी की मांग पर अड़े हुए हैं। उन्होंने मांगें पूरी होने तक मृतका का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है। परिजनों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, उनके घरों पर बुलडोजर चलवाने, आर्थिक मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. विपिन ताड़ा ने बताया कि इस मामले में दो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, जिनमें गांव का ही एक पारस और दूसरा उसका दोस्त सुनील शामिल है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। उन्होंने कहा कि अब तक की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी युवक और नाबालिग पहले से एक-दूसरे को जानते थे। मामले की जांच जारी है और शीघ्र ही गिरफ्तारी की जाएगी।
उधर, जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी गांव में मौजूद हैं। अधिकारी पीड़ित परिवार को समझाने और अंतिम संस्कार के लिए राजी करने का प्रयास कर रहे हैं।
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