मेरठ , अप्रैल 11 -- उत्तर प्रदेश में मेरठ छावनी स्थित सदर क्षेत्र के तेली मोहल्ले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने रिश्तों, संवेदनाओं और मानसिक स्थिति, तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक वृद्ध पिता अपनी ही बेटी के शव के साथ करीब दो महीने तक उसी घर में रहता रहा, बिना किसी को भनक लगे।
पुलिस के मुताबिक 76 वर्षीय सेवानिवृत्त क्लर्क उदय भानु विश्वास की 33 वर्षीय पुत्री प्रियंका की मौत अक्तूबर में हो गई थी। वह कुछ समय से बीमार थी और एक निजी स्कूल में शिक्षिका थी। लेकिन मौत के बाद जो हुआ उसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया। उदय भानु ने न तो किसी को सूचना दी न अंतिम संस्कार किया, बल्कि शव को कमरे में ही रखकर उसके ऊपर लगातार पानी बहाता रहा ताकि दुर्गंध बाहर न फैले। पहचान छिपाने के लिए उस पर कूड़ा-करकट तक डाल दिया गया। इसके अलावा दुर्गंध को बाहर फैलने से रोकने के लिये परफ्यूम भी छिड़कता रहा।
करीब डेढ़ महीने बाद वह घर पर ताला लगाकर हरिद्वार चला गया जहां अलग-अलग धर्मशालाओं में ठहरता रहा। गत शुक्रवार को जब परिजनों ने उसे शहर में देखा और बेटी के बारे में पूछा तो वह बार-बार भ्रामक बातें करता रहा, कभी देहरादून तो कभी गाजियाबाद में इलाज की कहानी सुनाता रहा। सख्ती से पूछताछ करने पर आखिरकार सच सामने आ ही गया।
बताया जा रहा है कि उदय भानु अंधविश्वास के प्रभाव में था। उसे संदेह था कि उसकी बेटी पर किसी ने तांत्रिक क्रिया कराई है। इलाज के लिए डॉक्टर के बजाय उसने धार्मिक व्यक्तियों का सहारा लिया। यहां तक कि अंतिम संस्कार में खर्च की बात सुनकर वह टालता रहा और शव को घर में ही छोड़ दिया।
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