मेरठ , जनवरी 19 -- दलित महिला की हत्या और नाबालिग बेटी के अपहरण से उपजा आक्रोश अब मेरठ के कपसाड़ गांव की सीमाओं से बाहर निकलकर सड़कों और टोल प्लाजा तक पहुंच गया है।

पिछले दो दिन से सुलग रहा यह मामला शनिवार को उस वक्त और भड़क उठा, जब नेताओं, संगठनों और समर्थकों के पहुंचने की कोशिशों ने प्रशासन को सख्त नाकेबंदी और कड़े सुरक्षा इंतजामों के लिए मजबूर कर दिया। हालात इतने संवेदनशील हो गए कि पुलिस को गांव ही नहीं, उससे जुड़े तमाम मार्गों पर भी अभूतपूर्व सतर्कता बरतनी पड़ी। यहां तक कि मीडिया कर्मियों को भी फिलहाल गांव में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है।

पुलिस के अनुसार स्थिति की गंभीरता को देखते अटेरना पुल सहित गांव को जोड़ने वाले सभी मार्गों पर कड़ी बैरिकेडिंग कर दी गई है। तमाम आला अधिकारी स्वयं मौके पर डेरा डाले हुए हैं और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। केवल स्थानीय ग्रामीणों को पहचान सत्यापन के बाद आने-जाने की छूट दी जा रही है।

इसी बीच, घटना के विरोध में शनिवार को गांव पहुंचने की कोशिश कर रहे समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन और पार्टी कार्यकर्ताओं को काशी टोल प्लाजा पर रोक दिया गया। पुलिस की इस कार्रवाई से नाराज सपा कार्यकर्ताओं ने टोल प्लाजा पर हंगामा किया, जिससे पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई। हालात बिगड़ते देख अतिरिक्त पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स को मौके पर तैनात करना पड़ा।

बताया गया है कि नोकझोंक के बाद सपा सांसद, विधायक और पदाधिकारी समर्थकों के साथ एक्सप्रेसवे पर धरने पर बैठ गए। पुलिस ने किसी तरह उन्हें समझा-बुझाकर वापस लौटाया। जबकि दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद से भीम आर्मी के कार्यकर्ता भी कपसाड़ जाने के लिए काशी टोल पहुंचे, जिन्हें पुलिस ने रोक दिया। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड हटाने की कोशिश की, जिससे मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। वहीं नगीना सांसद चंद्रशेखर को मेरठ आने से गाजियाबाद में ही रोक लिया गया।

तनाव के बीच मेरठ के पुलिस उपमहानिरीक्षक कला निधि नैथानी ने गांव का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सरधना के सलावा चौराहे पर नाकाबंदी के चलते चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। वहीं, सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भी अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन किया, जिन्हें पुलिस ने आगे बढ़ने से रोक दिया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि हत्या और अपहरण के मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है और लगातार दबिशें दी जा रही हैं। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी कर मामले का खुलासा किया जाएगा। इस मामले में जिला प्रशासन ने साफ किया है कि हालात सामान्य होने तक किसी भी राजनीतिक या सामाजिक प्रतिनिधिमंडल को गांव में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

गौरतलब है कि गत गुरुवार को कपसाड़ गांव में अनुसूचित जाति की नाबालिग युवती का अपहरण कर लिया गया था। अपहरण का विरोध करने पर उसकी मां की धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई थी। इस जघन्य वारदात के बाद से गांव में लगातार तनाव बना हुआ है।

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