जम्मू , मार्च 14 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जम्मू कश्मीर इकाई ने शनिवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार पर मेडिकल संस्थानों में पदों के सृजन और वितरण को लेकर "स्पष्ट रूप से पक्षपातपूर्ण और अनुचित" निर्णय लेने का आरोप लगाया।
जम्मू स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में विधायकों शाम लाल शर्मा, श्री सुरजीत सिंह सलाथिया, श्री चौधरी विक्रम रंधावा और श्री युद्धवीर सेठी ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि हालिया कैबिनेट बैठक में पदों के सृजन से जुड़ा फैसला जम्मू क्षेत्र के प्रति सरकार की भेदभावपूर्ण मानसिकता को उजागर करता है।
विधायक शाम लाल शर्मा ने कहा कि सरकार ने कुल 136 पद सृजित किए हैं, जिनमें से 90 पद कश्मीर को दिए गए हैं, जिनमें 17 प्रोफेसर और 73 एसोसिएट प्रोफेसर शामिल हैं, जबकि जम्मू को केवल 46 पद दिए गए हैं, जिनमें 10 प्रोफेसर और 36 एसोसिएट प्रोफेसर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह वितरण पूरी तरह पक्षपातपूर्ण है और जम्मू के लोगों के उचित हिस्से से वंचित करने जैसा है।
श्री शर्मा ने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार ने पदों के आवंटन में स्थापित नियमों और मानकों की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार भी यह वितरण असंतुलित और अस्वीकार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि पदों के आवंटन के समय अस्पतालों के वास्तविक कार्यभार, आईपीडी और ओपीडी मरीजों की संख्या या स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरतों जैसे महत्वपूर्ण मानकों को ध्यान में नहीं रखा गया।
श्री शर्मा ने जम्मू के स्वास्थ्य ढांचे की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि कई अस्पतालों में स्टाफ की भर्ती से जुड़े प्रस्ताव वर्षों से लंबित पड़े हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जम्मू के बोन एंड जॉइंट अस्पताल में 299 पदों की आवश्यकता बताई गई थी, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली और अस्पताल आंतरिक व्यवस्था के सहारे चल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी मेडिकल कॉलेज जम्मू के नवजात विभाग को 17 पदों और आपातकालीन चिकित्सा विभाग को 61 पदों की आवश्यकता है, लेकिन इन जरूरी मांगों को भी नजरअंदाज किया गया है।
श्री शर्मा ने यह भी याद दिलाया कि उपराज्यपाल प्रशासन के दौरान प्रशासनिक परिषद ने स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के लिए 196 पद और गांधी नगर स्थित 200 बेड के मातृत्व अस्पताल के लिए 237 पदों को मंजूरी दी थी, लेकिन अब तक इन फैसलों को लागू नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जम्मू क्षेत्र को हर बार अपने अधिकारों के लिए आंदोलन क्यों करना पड़ता है। उनके अनुसार जम्मू के लोगों को अपने वैध अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है।
श्री शर्मा ने नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार में जम्मू क्षेत्र से आने वाले तीन कैबिनेट मंत्रियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि वे कैबिनेट में चुप बैठे हैं जबकि जम्मू के हितों की अनदेखी हो रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यह मुद्दा केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में सरकार के और भी पक्षपातपूर्ण फैसले सामने आ सकते हैं। भाजपा नेताओं ने कहा कि पार्टी ऐसे किसी भी भेदभावपूर्ण निर्णय का कड़ा विरोध करेगी और जम्मू क्षेत्र के साथ अन्याय नहीं होने देगी।
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