राजनांदगांव , नवंबर 06 -- छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के जिला उपभोक्ता विवाद आयोग ने अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति चिकित्सालय के अधीक्षक के खिलाफ 35 हजार का जुर्माना 45 दिनों के अंदर करने तथा ऐसा नहीं करने पर ब्याज दर नौ प्रतिशत वार्षिक लागू होगी।
साक्ष्य अधिनियम के तहत मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध न कराने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, राजनांदगांव ने भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति चिकित्सालय महाविद्यालय, राजनांदगांव के संयुक्त संचालक सह अधीक्षक प्रदीप बेग के विरुद्ध आज कड़ा निर्णय सुनाया है।
आयोग ने आदेश दिया है कि अनावेदक प्रदीप बेग, परिवादी नरेन्द्र कुमार जैन, संचालक अरिहंत मेडिकोज, राजनांदगांव को मानसिक प्रताड़ना के रूप में 25,000, उपभोक्ता विधिक खाते में 5,000 तथा वाद व्यय के रूप में 5,000 का भुगतान करें। साथ ही यह राशि 22 अक्टूबर 2024 से भुगतान की तारीख तक छह फीसदी वार्षिक ब्याज सहित अदा करनी होगी। यदि भुगतान 45 दिनों के भीतर नहीं किया जाता है तो ब्याज दर नौ प्रतिशत वार्षिक लागू होगी।
मामला वर्ष 2017-18 से संबंधित है, जब अरिहंत मेडिकोज द्वारा मेडिकल कॉलेज को दवाइयां सप्लाई की गई थीं, किंतु बिलों का भुगतान लंबित रहा। इसके बाद परिवादी ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 76 के तहत भुगतान संबंधित दस्तावेजों की जानकारी मांगी थी। इसके लिए निर्धारित शुल्क भी जमा किया गया था, लेकिन संबंधित अधिकारी द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
इस पर व्यथित होकर श्री जैन ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई। आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडु एवं सदस्य डा. आनंद वर्गीस की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।
फोरम ने अपने आदेश में कहा कि जानकारी देने से इनकार उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है और इससे मानसिक प्रताड़ना हुई है। यह फैसला सूचना मांगने वाले उपभोक्ताओं के लिए एक नजीर और सशक्त उदाहरण माना जा रहा है।
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