शिलांग , मार्च 11 -- मेघालय उच्च न्यायालय ने गारो हिल्स स्वायत्त जिला परिषद चुनाव से पहले एक बड़ा फैसला सुनाते हुए परिषद की कार्यकारी समिति की 17 फरवरी को जारी उस अधिसूचना को रद्द कर दिया, जिसमें उम्मीदवारों के लिए अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति एच.एस. थांगख्यू की एकल पीठ ने मंगलवार को पश्चिमी गारो हिल्स के नमाबिल्ला निवासी इनामुल हक की एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह अधिसूचना कानूनी जांच पर खरी नहीं उतरती। याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि एक कार्यकारी आदेश से वैध गैर-आदिवासी मतदाताओं को मताधिकार या चुनाव लड़ने से वंचित नहीं कर सकते, क्योंकि यह छठी अनुसूची के अनुच्छेद 2(6) के तहत बने 'असम और मेघालय स्वायत्त जिला (जिला परिषदों का संविधान) नियम, 1951' का उल्लंघन है।
गौरतलब है कि परिषद के नए चुनाव 10 अप्रैल को प्रस्तावित हैं।
याचिकाकर्ता के वकील के. पॉल ने तर्क दिया कि जिला परिषद बनने के बाद से ही मतदाता सूची में शामिल गैर-आदिवासी "स्वतंत्र रूप से मतदान" करते रहे हैं और उन्होंने परिषद के सदस्य के रूप में भी सेवा दी है। उन्होंने कहा कि बिना किसी विधायी मंजूरी के इस तरह का अचानक बदलाव "अक्षम और अनुचित" है।
परिषद के वकील एस. डे ने अधिसूचना का बचाव करते हुए कहा कि क्षेत्र में "जनसांख्यिकीय विस्फोट" हुआ है और स्थानीय आदिवासी आबादी के अधिकारों की सुरक्षा के लिए यह कदम आवश्यक था।
मेघालय के महाधिवक्ता अमित कुमार ने स्वीकार किया कि हालांकि यह अधिसूचना अच्छे इरादे से जारी की गई होगी लेकिन उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन न किए जाने के कारण इसे "वैध" नहीं कहा जा सकता।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित